प्राप्त जानकारी के अनुसार, शिविर में झंझेऊ, पुन्दलसर, लखासर, धर्मास, मिंगसरिया, नोखागांव, श्रीडूंगरगढ़, बीकानेर शहर, पेथड़ासर, कोलासर, धूपालिया, हिसार (हरियाणा), चूरू प्रांत के पायली, नूंवा, गौरीसर, जयपुर, सीकर, जैसलमेर, नागौर सहित कई स्थानों से कुल 85 स्वयंसेवक शामिल हुए।
शिविर के संचालक, संघ के केंद्रीय कार्यकारी गजेन्द्र सिंह आऊ ने अपने विदाई संदेश में प्रशिक्षणार्थियों को प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि इन सात दिनों में क्षत्रियोचित जीवन जीने के लिए गीता के अनुसार जो संस्कार प्राप्त हुए हैं, उन्हें अपने जीवन में उतारें। उन्होंने स्वयंसेवकों को समाज, देश और धर्म के लिए उपयोगी बनने का आह्वान किया।
गजेन्द्र सिंह आऊ ने सद्गुणों के विकास और दुर्गुणों के विनाश पर बल दिया। उन्होंने कहा कि संघ पिछले लगभग 80 वर्षों से सामूहिक संस्कारमयी कर्मप्रणाली के माध्यम से युवक-युवतियों में संस्कार निर्माण का कार्य लगातार कर रहा है। उन्होंने ऐतिहासिक महापुरुषों के जीवन को प्रेरणास्रोत बताते हुए उनके त्याग और बलिदान के गुणों को अपनाने की बात कही।
उन्होंने आगे कहा कि संघ द्वारा बताए गए मार्ग पर चलने के लिए शारीरिक, ईष्ट और मनोबल को मजबूत बनाए रखने का सतत प्रयत्न करना होगा। उन्होंने व्यक्तिगत हितों को समाज हित में बदलकर कार्य करने का संदेश दिया और स्वयंसेवकों को संघ से जुड़े रहने और लगातार सक्रिय रहने के लिए प्रोत्साहित किया।
इस अवसर पर बीकानेर संभाग प्रमुख रेवंतसिंह जाखासर अपने सहयोगियों के साथ शिविर में उपस्थित रहे। शिविर की व्यवस्थाएं झंझेऊ ग्रामवासियों के सहयोग से संपन्न हुईं।