धाम में एक भव्य महायज्ञ का आयोजन किया गया, जिसकी पवित्र अग्नि में भक्तों ने घी की आहुतियां अर्पित कीं। परमहंस सोमनाथजी महाराज और महंत भंवरनाथ ज्याणी के सान्निध्य में, वैदिक मंत्रोच्चार से पूरा वातावरण गुंजायमान था। ऐसा लग रहा था मानो सदियों पुरानी परंपरा आज भी जीवित है और भक्तों के दिलों में आस्था की लौ जलाए हुए है।
दिनभर मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। देव जसनाथजी के जयकारों से माहौल भक्तिमय हो गया। विभिन्न जिलों और गांवों से अनुयायी आए और उन्होंने श्रद्धापूर्वक धोक लगाई। ऐसा लग रहा था मानो पूरा राजस्थान आज लिखमादेसर में सिमट आया है।
रविवार की रात यहां एक विशाल जागरण का आयोजन किया गया। परंपरागत सबद गायन से शुरू हुआ कार्यक्रम, अग्नि नृत्य के अद्भुत प्रदर्शन के साथ संपन्न हुआ। कलाकारों ने अपनी कला से ऐसा समां बांधा कि पूरी रात भक्तजन भक्ति के सागर में डूबे रहे।
हंसोजी धाम, न केवल एक मंदिर है, बल्कि एक ऐसा स्थान है जहाँ सदियों से लोगों की आस्था जुड़ी हुई है। यहां आने वाले हर भक्त को शांति और सुकून मिलता है। यह स्थान आज भी उसी श्रद्धा और भक्ति के साथ जीवंत है, जो इसे पीढ़ियों से विरासत में मिली है। और आज, एक बार फिर, लिखमादेसर का यह सिद्ध धाम, हजारों भक्तों की आस्था का साक्षी बना।