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रेहड़ी-ठेला वालों ने मांगा रोजगार का हक, स्थाई जगह देने की मांग की, मिला आश्वासन

गांधी पार्क से शुरू हुई रैली, शहर के मुख्य मार्गों से गुजरी और तहसील कार्यालय पर जाकर समाप्त हुई। प्रदर्शनकारियों ने यहां करीब दो घंटे तक जमकर नारेबाजी की, अपनी परेशानियों और मांगों को बुलंद आवाज़ में व्यक्त किया।

रेहड़ी-ठेला संचालकों और मनिहारी का कार्य करने वाली महिलाओं का कहना था कि उन्हें बार-बार बाजार से हटाया जा रहा है, जिससे उनकी आजीविका पर संकट आ गया है। उन्होंने बताया कि वे कई दशकों से यही काम कर रहे हैं और यही उनकी रोजी-रोटी का एकमात्र सहारा है।

तहसीलदार श्रीवर्द्धन शर्मा और ईओ को एक ज्ञापन सौंपा गया, जिसमें उनकी समस्याओं और मांगों का उल्लेख था। श्री शर्मा ने उनकी बातों को ध्यान से सुना और सकारात्मक कार्रवाई का आश्वासन दिया।

मामले की गंभीरता को देखते हुए, उपखंड अधिकारी शुभम शर्मा ने मौके पर ही तहसीलदार को बाजार का निरीक्षण करने और ठेले वालों की समस्या का जल्द से जल्द समाधान करने के निर्देश दिए।

इस घटना ने एक बार फिर शहर के विकास और गरीब तबके के जीवनयापन के बीच के नाजुक संतुलन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और इन मेहनतकशों को उनकी रोजी-रोटी का हक कैसे दिलाता है।

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