मेले में प्रदर्शित हर मॉडल, हर चार्ट और हर प्रयोग, युवा मन की जिज्ञासा और कुछ नया करने की ललक का प्रतीक था। बच्चों ने अपनी मेहनत और लगन से विज्ञान के सिद्धांतों को सरल और आकर्षक रूप में प्रस्तुत किया।
विज्ञान मेला प्रभारी शशिकला जी ने बताया कि इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में विज्ञान के प्रति प्रेम जगाना और उनकी रचनात्मक प्रतिभा को प्रोत्साहित करना है। यह मेला, बच्चों को विज्ञान की दुनिया में खो जाने और कुछ नया खोजने का अवसर प्रदान करता है।
संस्था प्रधान खुशबू सारण जी ने विद्यार्थियों के प्रदर्शन को बारीकी से देखा और उनके नवाचारपूर्ण विचारों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन विद्यार्थियों को भविष्य में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने के लिए प्रेरित करते हैं। उनका मानना है कि आज के ये नन्हे वैज्ञानिक, कल देश के भविष्य को नई दिशा देंगे।
मेले के दौरान विद्यालय के सभी शिक्षकों ने उपस्थित रहकर बच्चों का उत्साहवर्धन किया और उन्हें प्रेरित किया। यह आयोजन न केवल विद्यार्थियों के लिए एक मंच था, बल्कि शिक्षकों के लिए भी अपनी रचनात्मकता को प्रदर्शित करने का अवसर था।
कितासर के इस विज्ञान मेले ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि प्रतिभा किसी एक जगह या वर्ग की मोहताज नहीं होती। यदि सही मार्गदर्शन और अवसर मिले तो छोटे से गाँव के बच्चे भी विज्ञान के क्षेत्र में बड़ी ऊंचाइयां छू सकते हैं। यह मेला, निश्चित रूप से विद्यार्थियों को विज्ञान के प्रति अधिक उत्सुक बनाएगा और उन्हें भविष्य में नए आविष्कार करने के लिए प्रेरित करेगा।