इस योजना के तहत युवाओं को मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) सहित 11 महत्वपूर्ण विभागों में फेलो के रूप में नियुक्त किया जाएगा। यह न केवल युवाओं को सरकारी तंत्र को करीब से देखने का मौका देगा, बल्कि उनके विचारों और ऊर्जा को शासन में शामिल करने का भी एक प्रयास है।
इस फैलोशिप में चयनित युवाओं को सरकार हर महीने 60,000 रुपये का स्टाइपेंड देगी, साथ ही 5,000 रुपये का अतिरिक्त भत्ता भी मिलेगा। इस प्रकार युवाओं को कुल 65,000 रुपये की मासिक राशि प्राप्त होगी, जो उन्हें अपने सपनों को साकार करने में मदद करेगी।
इस फैलोशिप के लिए आवेदन प्रक्रिया 10 अक्टूबर को पूरी हो चुकी है, और अब आवेदकों को आगे की चयन प्रक्रिया के लिए तैयार रहना होगा। उन्हें ग्रुप डिस्कशन और पर्सनल इंटरव्यू के लिए बुलाया जाएगा, जहाँ उनके ज्ञान, अनुभव और विचारों का मूल्यांकन किया जाएगा। इंटरव्यू बोर्ड में मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) और आर्थिक-सांख्यिकी विभाग के अधिकारी शामिल होंगे।
ग्रुप डिस्कशन और इंटरव्यू के बाद, दोगुने अभ्यर्थियों की मेरिट लिस्ट निकाली जाएगी। चयनित युवाओं को एक हफ्ते का ओरिएंटेशन प्रोग्राम करवाया जाएगा, जिसमें उन्हें सरकारी कामकाज की बारीकियों से परिचित कराया जाएगा।
इन युवाओं को मुख्यमंत्री कार्यालय सहित 11 विभागों में तैनात किया जाएगा। प्रत्येक फेलो के लिए संबंधित विभाग के एसीएस या प्रमुख सचिव को मेंटर बनाया जाएगा, जो उन्हें मार्गदर्शन देंगे और उनके काम को दिशा देंगे। विभाग के संयुक्त सचिव नोडल अधिकारी होंगे, जो फेलो के रोजमर्रा के काम पर नजर रखेंगे।
फेलो को मुख्यमंत्री कार्यालय के निर्देश पर काम दिया जाएगा। उन्हें हर महीने अपने काम की प्रगति रिपोर्ट जमा करनी होगी और हर तीन महीने में उनके काम का रिव्यू किया जाएगा। फेलो को खुद का लैपटॉप और डाटा कार्ड रखना जरूरी होगा, ताकि वे अपने काम को सुचारू रूप से कर सकें। साथ ही उन्हें प्रोजेक्ट रिपोर्ट भी तैयार करनी होगी।
इस पूरे कार्यक्रम का संचालन आर्थिक और सांख्यिकी विभाग करेगा। इसके लिए एक प्रोग्राम इंप्लीमेंटेशन कमेटी बनाई गई है, जिसके अध्यक्ष आयोजना विभाग के प्रमुख सचिव होंगे। कमेटी फेलो के चयन के पैरामीटर और कार्य तय करेगी।
सूत्रों के अनुसार, राज्य में पहले यंग प्रोफेशनल्स स्कीम लागू थी, जिसके तहत युवाओं को इंटर्नशिप के रूप में सरकारी कामकाज का अनुभव कराया जाता था। अब सरकार ने उसी योजना को और मजबूत करते हुए सीएम फैलोशिप प्रोग्राम के रूप में लागू किया है।
सरकार का मानना है कि यह कदम प्रशासनिक तंत्र में युवाओं की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। इससे पढ़े-लिखे युवा न केवल सरकारी कामकाज को समझ पाएंगे बल्कि अपने सुझावों और इनोवेटिव सोच से शासन को भी नई दिशा दे सकेंगे। यह एक ऐसा अवसर है जो युवाओं को देश के विकास में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करेगा।