क्षेत्र के हजारों किसानों के खाते इसी बैंक में हैं, जिनमें जनधन योजना के अंतर्गत खोले गए खाते भी शामिल हैं। विलय के बाद सभी खाताधारकों को नए अकाउंट नंबर जारी किए गए हैं। लेकिन, समस्या यह है कि जनआधार कार्ड में अभी भी पुराने खाते ही लिंक हैं।
वर्तमान में किसानों की ऑनलाइन गिरदावरी चल रही है, जिसके लिए जनआधार कार्ड में सही अकाउंट नंबर का होना अनिवार्य है। पुराने अकाउंट नंबर लिंक होने के कारण किसान अपनी गिरदावरी ऑनलाइन नहीं करवा पा रहे हैं। उन्हें जनआधार में अपना अकाउंट नंबर बदलवाने के लिए मशक्कत करनी पड़ रही है, और दीपोत्सव के लंबे अवकाश के चलते यह प्रक्रिया और भी मुश्किल हो गई है।
किसानों की परेशानी यहीं खत्म नहीं होती। राजफैड की वेबसाइट पर अभी तक नए बैंक का नाम अपडेट नहीं हुआ है। पुराने बैंक का नाम तो दिख रहा है, लेकिन उसके अकाउंट नंबर मान्य नहीं हो रहे हैं। नए अकाउंट नंबर जनआधार से लिंक न होने के कारण किसान एक ई-मित्र से दूसरे ई-मित्र के चक्कर काट रहे हैं। पिछले तीन दिनों में इस बैंक के उपभोक्ता एक भी किसान की गिरदावरी नहीं हो पाई है। तोलियासर, लोढेरा, गुसाईंसर बड़ा, डेलवां, उदरासर सहित अनेक गांवों के अधिकांश किसान इसी बैंक के ग्राहक हैं और इस समस्या से जूझ रहे हैं।
रविवार को कुछ किसानों ने एक ई-मित्र केंद्र पर हंगामा भी किया और जनआधार में बदलाव कर गिरदावरी करने की मांग की। ई-मित्र संचालक ने अपनी मजबूरी बताई, लेकिन किसान अपनी समस्या बताने पर अड़े रहे। समझाने के बाद उन्हें वापस लौटा दिया गया। संचालकों के अनुसार, रविवार को अनेक ई-मित्र केंद्रों पर ऐसा नजारा देखने को मिला। किसानों को दीपोत्सव के लंबे अवकाश के बाद गिरदावरी बंद होने का डर सता रहा है। उनका कहना है कि यदि गिरदावरी बंद हो गई तो वे समर्थन मूल्य पर मूंगफली नहीं बेच पाएंगे।
जानकारों का कहना है कि जनआधार में सामान्य बदलाव में भी सात से दस दिन का समय लग जाता है। यदि यह संख्या हजारों में हो तो समय का अनुमान लगाना मुश्किल है। ऐसे में, यदि किसान जनआधार में बदलाव करवाने का रास्ता अपनाते हैं, तो सैकड़ों किसानों के गिरदावरी और टोकन कटने से वंचित रहने की संभावना है।
किसानों की नींद उड़ी हुई है, लेकिन बैंक अधिकारी इस संबंध में निश्चिंत दिखाई देते हैं। उनका कहना है कि वे उच्च अधिकारियों के निर्देशों के बिना कुछ भी नहीं कह सकते। किसानों को इस संबंध में अधिकारियों से किसी प्रयास की उम्मीद नहीं है। वहीं, शनिवार को किसानों ने विधायक ताराचंद सारस्वत को इस समस्या से अवगत कराया। जानकारी के अनुसार, सारस्वत ने जयपुर में अपने प्रतिनिधि को राजफैड के कार्यालय भेजा और पत्र देकर अधिकारियों से बैंक अकाउंट संबंधी जानकारी सीधे उठाने और किसानों की गिरदावरी करने की मांग की है। अधिकारियों ने तकनीकी जानकारों की राय से सकारात्मक कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है।
यह देखना होगा कि किसानों की इस समस्या का समाधान कब तक हो पाता है और वे समय पर अपनी गिरदावरी करवाकर समर्थन मूल्य पर अपनी फसल बेच पाते हैं या नहीं।