सोनियासर में आयोजित इस शिविर में सरपंच प्रशासक समेत कई ग्रामीण उपस्थित थे। ग्रामीणों ने अपनी समस्याओं को लिखित रूप में शिविर प्रभारी को सौंपा और उनके समाधान की मांग की।
मुख्य मुद्दा गिरदावरी को लेकर था। ग्रामीणों ने गिरदावरी प्रक्रिया में अनियमितताओं पर असंतोष व्यक्त किया और नायब तहसीलदार सरजीत कुमार धायल से मौके पर ही मुआयना करने का आग्रह किया। ग्रामीणों का आरोप था कि पटवारी द्वारा की गई गिरदावरी में कई गलतियां हैं। शिकायत पत्र में ग्रामीणों ने बिना निरीक्षण किए गिरदावरी करने, फसलों को गलत तरीके से दर्शाने और बारानी जमीन को सिंचित बताने जैसे गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने गिरदावरी की दोबारा जांच करवाने की मांग की, ताकि गांव का कोई भी ग्रामीण मुआवजे से वंचित न रहे। नायब तहसीलदार धायल ने ग्रामीणों को जल्द ही उचित कार्रवाई करने का आश्वासन दिया।
इसके अतिरिक्त, ग्रामीणों ने सोनियासर से नौसरिया फांटा तक की बुरी तरह से क्षतिग्रस्त सड़क के निर्माण की मांग भी उठाई। उनका कहना था कि सड़क की हालत इतनी खराब है कि वर्तमान में इस पर आवागमन पूरी तरह से बाधित है, जिससे उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
शिविर में ग्रामीणों ने गांव में ही आयुष्मान आरोग्य मंदिर आयुर्वेद औषधालय खुलवाने की मांग भी की, ताकि उन्हें स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के लिए दूर न जाना पड़े और स्थानीय स्तर पर ही इलाज मिल सके।
हालांकि निराशा के बीच, शिविर में एक परेशान परिवार के लंबित खाता विभाजन का मामला नायब तहसीलदार धायल द्वारा मौके पर ही सुलझा दिया गया, जिससे परिवार ने राहत की सांस ली और प्रशासन का आभार व्यक्त किया।
इस मौके पर सरपंच प्रशासक नंदकिशोर बिहाणी, भंवरलाल जोशी, पूनमचंद, दिनेश ज्याणी, मनोज जोशी, कन्हैया स्वामी, दिलीप सिंह, भंवरलाल, रामनिवास, श्रवणकुमार, बजरंग स्वामी, मंगेजसिंह, धर्माराम ज्याणी, रेखाराम, लिछमणराम, सोहनराम मूंड, हीरालाल सारण, विकास सहित अनेक ग्रामीण उपस्थित थे, जिन्होंने अपनी-अपनी समस्याओं से संबंधित पत्र अधिकारियों को सौंपे।
अब देखना यह है कि प्रशासन ग्रामीणों की इन समस्याओं पर कितनी जल्दी और कितनी गंभीरता से ध्यान देता है और क्या ये सेवा शिविर वास्तव में ग्रामीणों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला पाते हैं।