श्रीडूंगरगढ़, 17 अक्टूबर 2025: शहर में पट्टों के निरस्तीकरण का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। याद दिला दें, इस वर्ष 20 फरवरी को श्रीडूंगरगढ़ नगरपालिका ने कुछ पट्टे निरस्त किए थे। नगरपालिका का तर्क था कि ये पट्टे पालिका की भूमि पर थे और इनके कारण पालिका को नुकसान हो रहा था। इस कार्रवाई का आधार राजस्थान नगरपालिका अधिनियम, 2009 को बताया गया था।
अब इस घटनाक्रम में एक नया मोड़ आया है। जोधपुर उच्च न्यायालय ने इन निरस्त पट्टों में से एक पर रोक लगा दी है। न्यायाधीश सुनील बेनीवाल की खंडपीठ ने अधिवक्ता अनिरुद्ध कोठारी द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया।
अधिवक्ता रणवीरसिंह खिची ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि यह मामला सरकारी आईटीआई कॉलेज के पास स्थित मोनिका शर्मा के पट्टे से जुड़ा है। मोनिका शर्मा के पट्टे को निरस्त करने के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील दायर की गई थी। खिची के अनुसार, न्यायालय ने सुनवाई के बाद मोनिका शर्मा को स्टे की राहत प्रदान की है।
इस घटनाक्रम ने एक बार फिर नगरपालिका द्वारा किए गए पट्टा निरस्तीकरण की प्रक्रिया और उसके कानूनी पहलुओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में यह मामला क्या रुख लेता है और इसका अन्य निरस्त पट्टों पर क्या प्रभाव पड़ता है। फिलहाल, उच्च न्यायालय के इस फैसले ने पट्टाधारकों के बीच एक नई उम्मीद जगाई है।