सूत्रों के अनुसार, दिवंगत कन्हैयालाल सारस्वत के पुत्र वीरेंद्र की बाइक की टक्कर विपरीत दिशा से आ रही एक अन्य बाइक से हो गई। इस दुर्घटना में वीरेंद्र गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें तत्काल पीबीएम अस्पताल ले जाया गया, लेकिन अस्पताल पहुंचने के कुछ ही क्षणों बाद उन्होंने अंतिम सांस ली।
इस हृदयविदारक खबर से पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। वीरेंद्र के परिजन, सरपंच जसवीर सारण और गांव के कुछ गणमान्य लोग तुरंत पीबीएम अस्पताल पहुंचे। शुक्रवार की सुबह वीरेंद्र के शव का पोस्टमार्टम किया गया, जिसके बाद शव को परिजनों को सौंप दिया गया। कुछ ही देर में शव को बिग्गा लाया जाएगा, जहां उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
वीरेंद्र अपने तीन भाइयों में सबसे छोटे थे और बीछवाल के खारा स्थित एक फ्लोर मील में अकाउंटेंट के रूप में कार्यरत थे। वे अपने पीछे चार साल और ढाई साल के दो मासूम बेटों को छोड़ गए हैं। गांव में हर कोई इन बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित है और परिवार को सांत्वना दे रहा है।
वीरेंद्र के परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। यह घटना उनके लिए चार महीने में दूसरी बड़ी क्षति है। वीरेंद्र के पिता का निधन भी चार महीने पहले ही हुआ था। युवा वीरेंद्र की असामयिक मृत्यु से परिवार में कोहराम मच गया है और पूरे गांव में मातम छाया हुआ है। हर कोई इस दुखद घड़ी में शोक संतप्त परिवार के साथ खड़ा है।