3 अक्टूबर, 2025 की अर्धरात्रि, श्रीडूंगरगढ़ के निकट हाईवे पर एक हृदयविदारक दृश्य उपस्थित हुआ। सातलेरा गांव के पास, एक कार दो विशालकाय ट्रकों के बीच सैंडविच बन गई। धातु का चीत्कार और कांच के टुकड़े हवा में बिखर गए, मानो काल ने अपने क्रूर हाथों से जीवन को कुचलने का प्रयास किया हो।
हुआ यूँ कि एक कार, जो आगे चल रहे ट्रक के पीछे किसी कारणवश रुकी थी, तभी पीछे से आ रहे एक अन्य ट्रक ने उसे भीषण टक्कर मार दी। दो ट्रकों के मध्य फंसी कार बुरी तरह से चकनाचूर हो गई, उसकी धातु लहूलुहान हो गई।
कार में बीकानेर के गंगाशहर के तीन निवासी सवार थे – 52 वर्षीय शिव कुमार ब्राह्मण, उनकी पत्नी विमला देवी और 88 वर्षीय गंगा देवी, जो पूनम चंद ब्राह्मण की पत्नी हैं। वे अपने घर, गंगाशहर की ओर ही जा रहे थे, मानो नियति उन्हें किसी और ही रास्ते पर ले जाना चाहती थी।
इस दुर्घटना में तीनों ही घायल हो गए, लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि वे जीवित रहे। यह किसी चमत्कार से कम नहीं था। विमला देवी की स्थिति को देखते हुए उन्हें तत्काल उपजिला अस्पताल से बीकानेर रेफर कर दिया गया।
इस अंधेरी रात में, डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम वेलफेयर सोसायटी के सेवादार देवदूत बनकर आए। उन्होंने तुरंत घटनास्थल पर पहुंचकर घायल महिला को अस्पताल पहुंचाया, मानो जीवन की डोर को थामने के लिए ही वे वहां उपस्थित थे।
लखासर हाईवे टोल की क्रेन और कार्मिक भी तत्काल मौके पर पहुंचे। उन्होंने क्षतिग्रस्त वाहनों को हटाकर हाईवे पर यातायात को सुचारू किया, जिससे अन्य राहगीरों को राहत मिली।
दुर्घटनास्थल पर राहगीरों और आसपास के लोगों की भीड़ जमा हो गई। हर कोई इस भयावह दृश्य को देखकर सिहर उठा, लेकिन कार सवारों के बाल-बाल बचने पर उन्होंने राहत की सांस ली। यह घटना जीवन की क्षणभंगुरता और अनिश्चितता का प्रमाण थी।
पुलिस भी तुरंत घटनास्थल पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी। इस घटना ने एक बार फिर हाईवे पर सुरक्षा के मुद्दे को उजागर किया है।