श्रीडूंगरगढ़, 20 अगस्त 2025। रिश्तों की डोर जहाँ प्रेम और विश्वास से बुनी जाती है, वहीं दहेज की मांग ने एक बार फिर इसे तार-तार कर दिया है। श्रीडूंगरगढ़ थाने में एक ऐसा ही मामला दर्ज हुआ है, जिसने समाज में व्याप्त इस कुप्रथा की कड़वी सच्चाई को उजागर किया है।
यह कहानी है 23 वर्षीया माया की, जो मोमासर बास की रहने वाली हैं। माया का विवाह 18 मई 2019 को राजलदेसर के भार्गव बस्ती निवासी मनोज कुमार के साथ हुआ था। मायके वालों ने अपनी सामर्थ्य से बढ़कर बेटी को दान-दहेज दिया, लेकिन ससुराल में माया को वह खुशी नसीब न हो सकी जिसकी हर नवविवाहिता कल्पना करती है।
पीड़िता माया ने पुलिस को बताया कि विवाह के बाद से ही पति मनोज और सास सुमन देवी कम दहेज लाने की बात कहकर उसे ताने देने लगे। मानो दहेज की रकम से ही रिश्तों की कीमत तय होती हो। आरोप है कि आरोपियों ने दो लाख रुपये नकद और एक मोटरसाइकिल लाने की मांग की। जब यह मांग पूरी नहीं हुई, तो माया को शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाने लगा।
पीड़ा और अपमान सहती हुई माया लंबे समय तक अपने मायके में रही। इस बीच, देवर की सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई। लोक-लाज के भय से वह 2 जून 2024 को फिर ससुराल चली गई, यह सोचकर कि शायद हालात बदल गए होंगे। लेकिन ससुराल वालों का रवैया जस का तस रहा। आरोप है कि 15 दिन बाद ही उसे मारपीट कर घर से निकाल दिया गया।
माया के परिवार वालों ने कई बार ससुराल वालों को समझाने की कोशिश की, ताकि घर बस सके। लेकिन उनकी सारी कोशिशें नाकाम रहीं। आखिरकार, माया ने पुलिस का दरवाजा खटखटाया और पति मनोज कुमार और सास सुमन देवी के खिलाफ दहेज उत्पीड़न का मामला दर्ज कराया।
पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच एसआई मोहनलाल को सौंप दी है। अब यह देखना होगा कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और माया को न्याय मिल पाता है या नहीं। यह घटना एक बार फिर समाज को दहेज जैसी कुप्रथा पर विचार करने और इसे जड़ से मिटाने के लिए प्रेरित करती है।