श्रीडूंगरगढ़ ONE 24 जुलाई 2025। श्रीडूंगरगढ़ अंचल में अच्छी बरसात के बाद किसानों ने बारानी खेतों की खूब बुआई की, मानसून ने भी किसानों का साथ दिया और उगाव अच्छा देखकर किसान परिवार हर्षित हो गए। परंतु अब बारानी इलाकों में कातरा लट से हालात खराब हो रही है। कई किसान खेत काश्त पर लेने, बीज व बुआई के रूपए लगा देने और कड़ी मेहनत के बाद हाथ कुछ नहीं आने की बात कहते हुए मायूस हो रहें है। ये किसान खेतों को कातरा लट द्वारा चट कर जाने के कारण परेशान है। कातरे का प्रकोप क्षेत्र में फैल रहा है, नेशनल हाइवे से दक्षिण का इलाका जो अत्यधिक गहरे और लो क्वालिटी पानी वाला है, कातरे की चपेट में आया है। 21 जुलाई को भाजपा के युवा नेता मांगीलाल गोदारा ने समंदसर, मनकरासर, गुसाईसर बड़ा, बिग्गा, लादडिया, मोमासर क्षेत्र में खेतों कातरा होने और कृषि विभाग द्वारा अभियान चला कर इन्हें नष्ट करने की मांग करते हुए पत्र दिया। वहीं गांव जैतासर, पूनरासर, उदरासर, लखासर भी कातरे की चपेट में आ गए है। 22 जुलाई को किसानों ने स्थिति गंभीर होने की बात कही और बुधवार, 23 जुलाई को श्रीडूंगरगढ़ ONE की टीम ने बींझासर की रोही में अनेक खेतों में जाकर मौका मुआयना भी किया। यहां कई किसानों के खेत कातरा ने खाली कर दिए और ये मायूस किसान दुबारा बुवाई करवाने के लिए बरसात का इंतजार कर रहें है। गांव के बुजुर्गों ने बताया कि कातरा खेती को बर्बाद कर रहा है और ऐसा प्रकोप इससे पूर्व 80 के दशक में देखा था।
इन किसानों के खेतों में पहुंची टीम।
श्रीडूंगरगढ़ ONE। बुधवार को कृषि विभाग व कृषि वैज्ञानिकों की टीम ने श्रीडूंगरगढ़ क्षेत्र में किसानों के खेतों पर रैपिड रोविंग सर्वे कर कातरा के प्रकोप का स्तर जाना व नुकसान क्षेत्र का सघन निरीक्षण किया। सर्वे टीम में संयुक्त निदेशक कृषि कैलाश चौधरी, वरिष्ठ कीट वैज्ञानिक डॉ वीर सिंह यादव, डॉ एम एल रेगर, सहायक निदेशक कृषि रघुवरदयाल सुथार सहित कृषि अधिकारी रामनिवास गोदारा, सहायक कृषि अधिकारी हितेश जांगिड़ ने गांव गुसाईसर बड़ा की रोही में खेत काश्त कर रहें ऊपनी के किसान बख्तावर, इसी रोही में जयप्रकाश गोदारा, मघाराम भैराराम के खेत में तथा श्रीडूंगरगढ़ की रोही में ओमप्रकाश खिलेरी के खेत में पहुंच कर कातरा प्रकोप की स्थिति का निरीक्षण किया।
विशेषज्ञों ने दी जानकारी, सुझाए उपाय, अपनाए किसान।
श्रीडूंगरगढ़ ONE। सहायक निदेशक कृषि रघुवरदयाल सुथार ने बताया कि श्रीडूंगरगढ़ के खेतों में कातरा का प्रकोप बिखरे हुए क्षेत्र में नजर आया है। यहां नुकसान मोठ मूंग व बाजरा में अधिक मिला है। ये डेढ़ माह पुराने उगी फसलों में नुकसान कम करेगा। वहीं 10 से 20 दिनों में जिन खेतों में फसल उगाव हुआ है, उनमें नुकसान अधिक हो रहा है। सुथार ने बताया कि मादा कीट एक बार में 600 से 700 सौ अंडे देती है, जिनसे 2 से 3 दिन में लटें निकल आती हैं। मादा पतंगें पत्तियों की निचली सतह पर अंडे देती हैं, जो पीले रंग के होते हैं और पोस्त के बीज जैसे दिखते हैं। इन अंडों से सूंडियां या लार्वा या लटें निकलती हैं, जो पौधों की पत्तियों को खाती हैं। इसके अलावा इसकी लटे कीड़े के बच्चे फसलों की पत्तियों को कुतरकर नष्ट कर देती हैं, जिससे पौधे सूखकर मर जाते हैं। सुथार ने क्षेत्र के किसानों को क्लोरोफाइसी फॉस 20% दवा का प्रयोग 250 एमएल प्रति बीघा के हिसाब से स्प्रे करने, क्यूनालफॉस डेढ़ प्रतिशत चूर्ण दवा का 6 किलो प्रति बीघा की दर से भुरकाव करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि कातरे की लट के आगमन को रोकने के लिए खेत के चारों तरफ खाई खोदने एवं खाईयों में मिथाईल पैराथियॉन 2 प्रतिशत चूर्ण भुरक देवें ताकि खाई में गिरकर आने वाली लटे नष्ट हो जायें। मिले पानी की परात रखें ताकि रोशनी पर आकर्षित हो एवं जलकर नष्ट हो जायें।
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