श्रीडूंगरगढ़ ONE 19 दिसंबर 2025। गांव सेरूणा के तेजा गार्डन में आयोजित भागवत कथा में शुक्रवार को तीसरे दिन प्रसिद्ध कथावाचक गौरव कृष्ण गोस्वामीजी ने भागवत को गंगा के समान पवित्र करने वाली बताया। महाराज ने कहा कि परिवार और समाज में मैं मेरा, तु तेरा ही कलह का मूल है। यदि मैं तेरा और तु मेरा का भाव आ जाए तो परिवार व समाज में शांति हो जाए। भक्त ध्रुव की कथा का उल्लेख करते हुए कहा कि अभिमान जहां है वहां बने बनाए रिश्ते टूट जाते है और जहां समर्पण आ जावें वहां टूटे हुए रिश्ते भी बन जाते है। गोस्वामीजी ने कथा का आध्यात्मिक पक्ष भी सुनाया व बुद्धि व मन के द्वंद्व को विस्तार से समझाया। उन्होंने संयुक्त परिवार श्रेष्ठ बताते हुए कहा कि आज विज्ञान ने तरक्की बहुत कर ली, परंतु प्रेम भाव समाप्त हो रहा है। ऐसे में परिवारों में उत्सवों का आयोजन होते रहना चाहिए जिसे सभी मिलकर मनाए और आपसी प्रेम भाव बना रहें। गोस्वामीजी ने मोबाइल के दुरूपयोग के बारे में बताते हुए कहा कि आज व्यक्ति भौतिकतावादी हो गया है। आज लोग व्यक्ति प्रेमी नहीं बल्कि वस्तु प्रेमी हो गए है। महाराज ने कहा कि अन्याय से कमाए धन में कलयुग विराजित रहता है और अन्याय से कमाए धन से घर में अशांति आएगी। ऐसा धन फलेगा नहीं वहीं नीति व न्याय से कमाए हुए धन में कृष्ण है, ऐसा धन फलेगा, परिवार में सुख व शांति लाएगा। उन्होंने दक्ष प्रजापति, सती देह त्याग व शिव कृपा की कथा का वर्णन करते हुए सम्मान लेने से ज्यादा सम्मान देने का भाव रखने की बात कही। अजामिल कथा का वर्णन करते हुए नामजप की महिमा सुनाई व नामजप करते रहने की प्रेरणा दी। कथा में सुदंर झांकी सजाई गई और भगवान के विभिन्न अवतारों की कथा सुनाई गई। श्रीडूंगरगढ़ निवासी और दिल्ली प्रवासी राधाकृष्ण करनाणी परिवार द्वारा आयोजित कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे और भक्तिरस गंगा का आनंद लिया। कथा में संगीतमय भजन कीर्तन की भक्ति बयार बही जिसमें हरि आ जावो एकबार.. भजन पर श्रद्धालु झूम उठे। शनिवार को कथा स्थल पर कृष्ण जन्मोत्सव मनाया जाएगा। विदित रहें कथा में शामिल होने के लिए आयोजक परिवार द्वारा श्रीडूंगरगढ़ से बसों व छोटी गाड़ियों की व्यवस्था की गई है। आड़सर बास में श्रीराम मंदिर से, कालूबास में पाराशर मंदिर के पास से, बिग्गाबास में गणेश मंदिर के निकट से व मोमासर बास में घींदड़ मैदान के पास से बसें दोपहर एक बजे रवाना होगी। वहीं झंवरो के मंदिर के निकट से छोटी गाड़ियां भी जाएगी।