जैसे ही आग की सूचना फैली, आसपास के खेतों में काम कर रहे किसान और परिवार के सदस्य अपनी जान की परवाह किए बिना आग बुझाने के लिए दौड़े। हर कोई उस भयावह दृश्य को देखकर हतप्रभ था। ढाणी में रखी गृहस्थी का सामान, कपड़े, राशन, बर्तन और साथ ही 8 हजार रुपये की नगदी, सब कुछ देखते ही देखते राख के ढेर में तब्दील हो गया।
रतनाराम ने बताया कि परिवार खेत में काम कर रहा था और अचानक ही ढाणी में आग लग गई। आग लगने का कारण स्पष्ट नहीं हो पाया है। आसपास पानी का अभाव था, इसलिए ग्रामीणों ने मिट्टी डालकर आग पर काबू पाने की कोशिश की।
पड़ोसी किसानों चेतन, मूलाराम मेघवाल, मुखराम, लूणाराम और दयाल ने तत्परता दिखाते हुए मौके पर पहुंचकर मिट्टी डालकर आग बुझाने में भरपूर सहयोग किया। उनकी एकजुटता और मानवीय संवेदना ने उस मुश्किल घड़ी में परिवार को सहारा दिया।
इस घटना से रतनाराम और उनका परिवार गहरे संकट में है। उनकी मेहनत और जीवन भर की जमा पूंजी आग की भेंट चढ़ गई। पड़ौसी किसानों ने ग्राम विकास अधिकारी और प्रशासक को घटना की सूचना दी है और परिवार की मदद करने की गुहार लगाई है। यह उम्मीद की जा रही है कि प्रशासन और समाज के उदार हृदय वाले लोग इस मुश्किल समय में पीड़ित परिवार की मदद के लिए आगे आएंगे। यह घटना एक बार फिर हमें याद दिलाती है कि जीवन कितना अनिश्चित है और हमें एक-दूसरे के प्रति सहानुभूति और सहयोग का भाव रखना चाहिए।