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झोरड़ा में सर्पों के देव बाबा हरिरामजी महाराज का चार दिवसीय मेला 26 अगस्त से शुरू होगा

श्रीडूंगरगढ़, 22 अगस्त, 2025। रेगिस्तान की तपती धरती पर आस्था की एक शीतल बयार बहने को तैयार है। नागौर जिले के झोरड़ा गांव में बाबा हरिरामजी महाराज के धाम पर लगने वाला वार्षिक मेला, जो सदियों से परंपरा का अटूट हिस्सा रहा है, इस बार 26 अगस्त, मंगलवार से शुरू होगा। भादवा शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि से आरंभ होकर यह मेला 29 अगस्त, शुक्रवार को षष्ठी तिथि तक चलेगा।

मंदिर के पुजारी हनुमान प्रसाद बताते हैं कि यह मेला न केवल एक धार्मिक आयोजन है, बल्कि एक ऐसा अवसर है जब दूर-दूर से लोग एक साथ आते हैं, अपनी आस्था और श्रद्धा को व्यक्त करते हैं।

और क्या है इस मेले में खास? 27 अगस्त को चतुर्थी तिथि की रात, एक भव्य जागरण का आयोजन किया जाएगा। इस रात, देशभर से आए प्रसिद्ध गायक और कलाकार बाबा हरिरामजी महाराज की महिमा का गुणगान करेंगे। भजनों और कथाओं के माध्यम से, वे बाबा के यश और करुणा को श्रोताओं तक पहुंचाएंगे। मंदिर परिसर को इस अवसर के लिए विशेष रूप से सजाया जा रहा है। रंग-बिरंगी रोशनी और विद्युत सजावट, मानो आस्था के इस महापर्व को एक नया आयाम दे रही हैं।

गौरीशंकर शर्मा, सातलेरा से बताते हैं कि देश के कोने-कोने से श्रद्धालु, कई दिनों की पैदल यात्रा करके या वाहनों से, झोरड़ा धाम पहुंचते हैं। यहां, वे बाबा से जहरीले जीव-जंतुओं से रक्षा की प्रार्थना करते हैं, अपने परिवारों के लिए मंगलकामना करते हैं।

श्रीडूंगरगढ़ और आसपास के गांवों में भी मेले को लेकर उत्साह का माहौल है। कई पैदल यात्री संघ अपनी तैयारियों में जुटे हुए हैं और जल्द ही झोरड़ा धाम के लिए रवाना होंगे। यह मेला, केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि एक ऐसा अवसर है जब लोग अपनी दैनिक चिंताओं को भूलकर, आस्था और भक्ति के रंग में रंग जाते हैं। यह एक ऐसा अनुभव है जो उन्हें नई ऊर्जा और प्रेरणा देता है।

झोरड़ा धाम का यह मेला, न केवल आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह हमारी सांस्कृतिक विरासत का भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह हमें याद दिलाता है कि जीवन में श्रद्धा और विश्वास का कितना महत्व है।

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