श्रीडूंगरगढ़, 1 दिसंबर 2025। बदलते समय में, जहाँ शादियों में चकाचौंध और दिखावे का बोलबाला है, वहीं श्रीडूंगरगढ़ के लोढ़ेरा गाँव के गोदारा परिवार ने एक मिसाल कायम की है। उन्होंने बिना किसी नगदी, सामान या गहने के पूर्णतया दहेज मुक्त विवाह संपन्न कर समाज को एक प्रेरणादायक संदेश दिया है।
गाँव के स्टेशन मास्टर पूनमचंद, जो कालूराम गोदारा के पुत्र और पेमाराम गोदारा के सुपौत्र हैं, का विवाह बीती रात बरजांगसर गाँव में प्रह्लादराम सियाग की पुत्री उर्मिला के साथ संपन्न हुआ। उर्मिला स्वयं भी राजस्थान पुलिस में कांस्टेबल के पद पर कार्यरत हैं। यह विवाह पूरी तरह से सादगी भरे माहौल में, विधि-विधान के साथ संपन्न हुआ।
पूनमचंद, जो वर्तमान में कर्नाटक के दाउणगिरी जिले के माईकोंडा रेलवे स्टेशन पर कार्यरत हैं, का मानना है कि दहेज प्रथा को समाज से मिटाने के लिए युवा पीढ़ी को शिक्षा का सही अर्थ समझना होगा और लड़के-लड़की को समान दर्जा देना होगा। उन्होंने विवाह में बढ़ते दिखावे को भी परंपरानुकूल नहीं माना और सादगी से विवाह संपन्न करने पर ज़ोर दिया। पूनमचंद का कहना है कि रिश्तों में आपसी समझ, स्नेह, सहयोग और विश्वास बना रहे तो किसी अन्य वस्तु की आवश्यकता नहीं होती।
उसी परिवार में, गोदारा परिवार की एएनएम बेटी सरिता गोदारा का विवाह भी कागासर निवासी रमेश मान, जो रामकिशन मान के पुत्र हैं, के साथ संपन्न हुआ। यह विवाह भी पूरी तरह से दहेज मुक्त था और इसे बेहद सादगी के साथ आयोजित किया गया।
गोदारा परिवार की इस पहल की गाँव में ही नहीं, चारों ओर सराहना हो रही है। नाते-रिश्तेदार इसे आज के समय की सबसे बड़ी ज़रूरत बताते हुए वधू को लक्ष्मी स्वरूप मानकर गृह प्रवेश करवाने की प्रशंसा कर रहे हैं। गाँव के सम्मानित लोगों ने भी विवाह को एक पवित्र बंधन बताते हुए शिक्षित युवाओं द्वारा दहेज को नकार देने की बात का समर्थन किया है। उनका मानना है कि यह बदलाव समाज को एक नई दिशा देगा।
गोदारा परिवार का यह कदम न केवल सराहनीय है, बल्कि यह सोचने पर भी मजबूर करता है कि क्या हम अपनी सामाजिक मान्यताओं और परंपराओं को नए सिरे से परिभाषित कर सकते हैं? क्या हम दिखावे और आडंबर से दूर, रिश्तों की गहराई और मूल्यों को महत्व दे सकते हैं?