गोपालसर के ग्रामीण लंबे समय से गांव में पेयजल आपूर्ति के लिए एक नए ट्यूबवेल की मांग कर रहे थे। पंचायत समिति ने ग्राम पंचायत को ट्यूबवेल निर्माण की स्वीकृति दी, जिससे ग्रामीणों में खुशी की लहर दौड़ गई। योजना के अनुसार, ट्यूबवेल के लिए 900 फीट की खुदाई और 6 एमएम के 300 किलोग्राम पाइप लगने थे।
हालांकि, ग्रामीणों का आरोप है कि ट्यूबवेल निर्माणकारी संस्था ने 785 फीट पर ही खुदाई बंद कर दी और केवल 3 से 4 एमएम के 145 किलोग्राम पाइप डालने की तैयारी कर ली। सोमवार को बड़ी संख्या में ग्रामीण निर्माण स्थल पर जमा हो गए और घटिया निर्माण का विरोध किया। उन्होंने मांग की कि गांव और जनहित में निर्धारित मानकों के अनुसार ही निर्माण कार्य किया जाए।
इस मुद्दे पर माहौल तब और गरमा गया जब कार्यकारी एजेंसी के ठेकेदार ने काम बंद कर दिया। ग्रामीणों का कहना है कि मौके पर पहुंचे जेईएन और एईएन ने भी 900 फीट तक खुदाई करने और उचित गुणवत्ता के पाइप डालने की बात कही, लेकिन ठेकेदार ने मशीन खराब होने का हवाला देते हुए खुदाई करने से मना कर दिया।
ग्रामीणों ने इस घटना पर रोष व्यक्त किया और मंगलवार को उपखंड कार्यालय और जिला कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर अधिकारियों से मिलने और शिकायत पत्र देने का निर्णय लिया है। उनका कहना है कि वे किसी भी कीमत पर घटिया निर्माण नहीं होने देंगे।
इस विरोध प्रदर्शन में बजरंगलाल, मदनलाल, राकेश बुड़िया, रामदयाल, राजूराम, मोहनलाल, लालूराम बुड़िया, गिरधारीलाल, करणीसिंह, रत्तीराम, भीखाराम, सुजानसिंह, मुलाराम, सुरजाराम भांमू, श्यामसुंदर नायक, उग्रसेन, भवानी, श्रवण कुमार, मुखराम, जगदीश, लालदास सहित गांव के कई गणमान्य व्यक्ति शामिल थे।
यह घटना सरकारी परियोजनाओं की निगरानी और गुणवत्ता नियंत्रण पर एक गंभीर सवाल खड़ा करती है। ग्रामीणों का आक्रोश इस बात का संकेत है कि वे अपने गांव के विकास कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही की उम्मीद करते हैं। अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और क्या ग्रामीणों की मांगों को पूरा किया जाता है।