श्रीडूंगरगढ़, 12 नवंबर 2025। श्रीडूंगरगढ़ के कल्याणसर नया में स्थित श्रीजसनाथजी पीड़ा ग्रस्त गौशाला इन दिनों भक्ति और श्रद्धा से सराबोर है। यहाँ चल रही गौकृपा कथा के छठवें दिन साध्वी श्रद्धा गोपाल दीदी ने गौसेवा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उपस्थित श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।
साध्वी श्रद्धा गोपाल दीदी ने कथा का आरम्भ करते हुए गौकृपा की महिमा का वर्णन किया। उन्होंने राजा दिलीप के जीवन से जुड़ी कथा का उल्लेख करते हुए कहा कि गौसेवा के प्रताप से ही उनके घर महाराज रघु जैसे प्रतापी पुत्र का जन्म हुआ, और उसी सूर्यवंश में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम ने अवतार लिया।
दीदी जी ने गर्भवती महिलाओं को विशेष रूप से प्रेरित करते हुए कहा कि गर्भ में पल रहे शिशु को संस्कारवान बनाने के लिए भगवान का ध्यान और गौसेवा अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सतोगुण के ध्यान से संतान माता-पिता की सेवा करने वाली होगी।
आजकल के युवाओं में मोबाइल की बढ़ती लत पर चिंता व्यक्त करते हुए साध्वी जी ने कहा कि मोबाइल पर रील्स देखने से संतान तमोगुणी हो सकती है, जो जीवन भर परेशानी का कारण बन सकती है। उन्होंने गाय और अन्य पशुओं के बीच अंतर बताते हुए गाय को माता मानकर उसकी सेवा करने की बात कही। उन्होंने जोर देकर कहा कि गाय केवल दूध देने का साधन नहीं है, बल्कि उसकी महिमा का वर्णन चार वेद, छह शास्त्र, 18 पुराण और श्रुतियों में मिलता है। गाय माता तो हमारे आराध्य देवताओं की भी आराध्य हैं।
कथा के दौरान साध्वी जी ने गुरु के महत्व को भी रेखांकित किया। उन्होंने गुरु को भगवान से मिलाने वाली महत्वपूर्ण कड़ी बताया और कहा कि गुरु के बिना ज्ञान संभव नहीं है।
साध्वी जी ने आज के युवा पीढ़ी को नशे, क्रोध और असंयमित जीवन से दूर रहने की प्रेरणा दी। उन्होंने नवयुवतियों को शिक्षा के साथ-साथ अपनी संस्कृति का भी ध्यान रखने का आग्रह किया। वराह पुराण का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि नित्य गौ परिक्रमा से पापों का नाश होता है। साध्वी जी ने कहा कि गाय के लिए दिया गया दान कभी व्यर्थ नहीं जाता है।
कथा के अंत में, गाँव के सरपंच आईदानाराम ने गौशाला में 31 हजार रूपए और 51 मण चारा दान करने की घोषणा की। इसके साथ ही, अनेक श्रद्धालुओं ने भी 5100 और 2100 रूपए की सहयोग राशि प्रदान की। गौशाला समिति के सदस्यों ने सभी दानदाताओं का आभार व्यक्त किया।
गौकृपा कथा में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ इस बात का प्रमाण है कि आज भी लोगों में गौसेवा के प्रति अटूट श्रद्धा और भक्ति विद्यमान है। साध्वी श्रद्धा गोपाल दीदी के विचारों ने लोगों को गौमाता के प्रति और अधिक संवेदनशील बनाया और उन्हें गौसेवा के लिए प्रेरित किया।