किसानों की दुर्दशा की एक और कहानी, जो श्रीडूंगरगढ़ के खेतों से उभर कर सामने आई है। यहां, जंगली सुअरों की बढ़ती आबादी ने किसानों की रातों की नींद और दिन का चैन छीन लिया है। वे अपनी फसलों को बचाने के लिए लगातार संघर्ष कर रहे हैं, पर उनकी मेहनत पर पानी फिरता नजर आ रहा है।
किसानों ने प्रशासन और वन विभाग के दरवाज़े कई बार खटखटाए हैं। उन्होंने अपनी पीड़ा बताई है, फसलों के नुकसान का दर्द साझा किया है, और इन जंगली सुअरों से निजात दिलाने की गुहार लगाई है। दुर्भाग्यवश, स्पष्ट नियमों और दिशा-निर्देशों की कमी के कारण, उनकी समस्या जस की तस बनी हुई है, बल्कि समय के साथ और भी गंभीर होती जा रही है।
शुक्रवार की सुबह, रीड़ी गांव के 32 वर्षीय मनोज जाखड़, अभयसिंहपुरा की रोही में स्थित अपने खेत पर काम कर रहे थे। वे खेत में लाइन बदलने में व्यस्त थे, तभी एक अप्रत्याशित घटना घटी। एक जंगली सुअर ने अचानक उन पर हमला कर दिया। सुअर ने मनोज के हाथ और पैर पर कई जगह दांतों से काट लिया, जिससे वह बुरी तरह घायल हो गए।
मनोज ने अपनी जान बचाने के लिए शोर मचाया। उनकी चीख-पुकार सुनकर परिजन लाठियां लेकर दौड़े, जिसके बाद सुअर भाग गया। आसपास के खेतों में काम कर रहे किसान भी घटनास्थल पर जमा हो गए और उन्होंने जंगली सुअरों से हो रही परेशानी के बारे में बताया।
किसानों का कहना है कि ये सुअर अब इतने बेखौफ हो गए हैं कि दिन-दहाड़े ढाणियों में घुस जाते हैं। वे न केवल घरों को नुकसान पहुंचा रहे हैं, बल्कि उगती हुई फसलों को भी बर्बाद कर रहे हैं। किसानों ने बताया कि वे पिछले एक साल से प्रशासन से इन सुअरों से छुटकारा दिलाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन उनकी फरियाद अभी तक अनसुनी है।
यह घटना किसानों की बेबसी और निराशा को उजागर करती है। वे प्रकृति की मार और प्रशासनिक उदासीनता के बीच पिस रहे हैं। यह देखना होगा कि क्या प्रशासन किसानों की इस गंभीर समस्या का कोई समाधान निकाल पाएगा, या उन्हें अपनी किस्मत के भरोसे छोड़ दिया जाएगा। यह एक ऐसा सवाल है जो श्रीडूंगरगढ़ के खेतों में गूंज रहा है।