बैठक में उपस्थित सभी सदस्यों ने सर्वसम्मति से रमजान को समिति का अध्यक्ष, कालू माली को सचिव और रेशमी को उपाध्यक्ष चुना। इसके अतिरिक्त, काली देवी, इमरान सानू, गफ्फुर तंवर, छगन माली, हनुमान माली, इरफान कुंजडा, तौफीक सब्जीफरोश और यूसुफ को समिति के सदस्य के रूप में चुना गया।
बैठक की शुरुआत शहीद भगत सिंह को याद करते हुए हुई, जिसके बाद उपस्थित जनों ने मजदूर हित में संघर्ष करने का संकल्प लिया। इस अवसर पर एसएफआई नेता मुकेश ज्याणी, गौरव टाडा, गिरधारी जाखड़, सरपंच सुनील मेघवाल, मुखराम नायक, मामराज गोदारा, विष्णु गुरावा, जावेद बेहलीम, बाबूलाल रैगर, राजू रैगर, सुभाष जावा, राहुल मोची, साहिल छींपा, ईश्वर माली, बाबू सिंधी, शीशपाल लुहार सहित अनेक महिला और पुरुष श्रमिक शामिल हुए।
बैठक में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया, जिसके अनुसार सोमवार को गांधी पार्क से मुख्य बाजार होते हुए उपखंड कार्यालय तक एक आक्रोश रैली निकाली जाएगी। यह रैली रेहड़ी पटरी वालों के अधिकारों के समर्थन में आयोजित की जाएगी।
पूर्व विधायक गिरधारी लाल महिया ने इस अवसर पर कहा कि रेहड़ी लगाने वालों के हित में संघर्ष करने वाले एसएफआई नेताओं पर मामला दर्ज करवाना स्थानीय प्रशासन की कायरता को दर्शाता है। उन्होंने रेहड़ी मजदूरों को बेदखल करने को कानूनी अपराध बताया और कहा कि रेहड़ी पटरी अधिनियम 2014 रेहड़ी मजदूरों को कानूनी संरक्षण प्रदान करता है। इस अधिनियम के तहत, जो मजदूर वर्षों से रेहड़ी लगा रहे हैं, उन्हें अपनी रेहड़ी लगाने और रोजगार बचाने का अधिकार है।
महिया ने आगे कहा कि पिछले 60 सालों से रेहड़ी मजदूर बस स्टेशन पर रेहड़ी लगा रहे हैं, लेकिन अब उनकी जगह अन्य वाहनों को लगाया जा रहा है। उन्होंने मांग की कि वाहनों के साथ-साथ रेहड़ी लगाने के लिए भी स्थाई जगह चिन्हित की जानी चाहिए और रेहड़ी लगाने की अनुमति दी जानी चाहिए। महिया ने सभी से सोमवार को होने वाले मजदूर संघर्ष में शामिल होने का आह्वान किया।