मंगलवार को आयोजित इस श्रद्धांजलि सभा में विद्यालय के सभी कर्मचारियों ने भाग लिया। दिवंगत जांगिड़ को याद करते हुए दो मिनट का मौन रखा गया, मानो हर कोई उनकी यादों में डूब गया हो। वे न केवल एक शिक्षक थे, बल्कि सहकर्मियों के बीच एक स्नेही मित्र और मार्गदर्शक भी थे।
श्रद्धांजलि सभा के बाद, विद्यालय के प्रांगण में एक अलग ही दृश्य देखने को मिला। सभी शिक्षक काली पट्टी बांधकर एकत्रित हुए और सरकार के प्रति अपना विरोध दर्ज कराया। यह विरोध, राजस्थान शिक्षक संघ प्रगतिशील के तहसील अध्यक्ष जयप्रकाश कस्वां के नेतृत्व में किया गया।
कस्वां ने शिक्षकों की पीड़ा को व्यक्त करते हुए कहा कि कुछ अधिकारी कर्मचारियों पर अव्यवहारिक और असंवेदनशील आदेश थोपकर अनावश्यक दबाव बना रहे हैं, जिसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। उनकी बातों में आक्रोश था, लेकिन साथ ही अपने साथियों के प्रति गहरी चिंता भी झलक रही थी।
शिक्षकों की मुख्य मांगें स्पष्ट थीं: राजकीय अवकाशों को कार्य दिवस बनाने की गलत प्रथा पर तत्काल रोक लगे। इसके अतिरिक्त, ड्यूटी समय के बाद अधिकारियों द्वारा सोशल मीडिया पर दिए जाने वाले निर्देशों पर भी पाबंदी लगाने की मांग की गई, ताकि कर्मचारियों के निजी जीवन में अनावश्यक हस्तक्षेप न हो।
इस प्रदर्शन में प्रधानाचार्य सहदेव सिंह, कमलेश सहारण, महेंद्र सिंह पूनियां, मीनू शर्मा, सरोज, संतोष शेखावत सहित विद्यालय के सभी कर्मचारी शामिल थे। उनकी एकजुटता दर्शाती है कि वे अपनी मांगों को लेकर कितने गंभीर हैं।
यह घटनाक्रम न केवल एक शिक्षक की दुखद विदाई और उसके बाद उठे विरोध की कहानी है, बल्कि यह शिक्षकों के सामने आने वाली चुनौतियों और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए उनकी प्रतिबद्धता को भी उजागर करता है। अब देखना यह है कि सरकार और संबंधित अधिकारी इस पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं और शिक्षकों की मांगों को किस प्रकार संबोधित करते हैं।