31 अक्टूबर, 2025: श्रीडूंगरगढ़ में ज़मीन की खरीद-फरोख्त में धोखाधड़ी का एक मामला सामने आया है। जानकारी के अभाव में एक ज़मीन खरीदार धोखाधड़ी का शिकार हो गया। इस संबंध में परिवादी ने श्रीडूंगरगढ़ थाने में दो व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज कराया है।
लखासर निवासी वीरेंद्रसिंह सुनार ने पुलिस को दी अपनी शिकायत में ठुकरियासर निवासी डूंगरराम जाट और नंदराम सांसी पर आरोप लगाया है कि उन्होंने उससे 6 लाख 50 हजार रुपये हड़प लिए हैं। वीरेंद्रसिंह ने पुलिस से आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और उसकी रकम वापस दिलवाने की मांग की है।
शिकायतकर्ता के अनुसार, वह हरियाणा के जिंद शहर का रहने वाला है और लखासर में हाईवे के पास ज़मीन खरीदकर एक होटल का निर्माण करवा रहा है। फरवरी 2025 में उसकी मुलाकात डूंगरराम से हुई, जिसने उसे बताया कि वह ज़मीनों की खरीद-फरोख्त का काम करता है और अगर उसे ज़मीन चाहिए तो वह दिलवा सकता है।
परिवादी के मुताबिक़ डूंगरराम ने उसे ठुकरियासर की रोही में खसरा नंबर 1751/1863 (रकबा 1.2100 हैक्टेयर) और खसरा नंबर 1758/1751 (रकबा 0.6487 हैक्टेयर) की ज़मीन दिखाई। डूंगरराम ने बताया कि यह ज़मीन नंदराम की है। दोनों के बीच 9 लाख 5 हजार रुपये प्रति बीघा के हिसाब से कुल 43 लाख 80 हजार 200 रुपये में सौदा तय हुआ।
परिवादी का कहना है कि उसने 21 फरवरी 2025 को 6 लाख 50 हजार रुपये बतौर बयाना दिए और 100 रुपये के स्टाम्प पेपर पर इकरारनामा किया गया। इकरारनामे पर आरोपी के हस्ताक्षर हुए और खरीदार के तौर पर परिवादी ने भी दस्तखत किए। इस दौरान, परिवादी के बेटे तुषार और रामचंद्र नामक दो गवाह भी मौजूद थे। इकरारनामे में शेष राशि 26 मई 2025 तक अदा करने और ज़मीन का विक्रय पत्र तैयार करवाने का समय निर्धारित किया गया था।
वीरेंद्रसिंह का आरोप है कि जब उसने ज़मीन का विक्रय पत्र तैयार करवाने के लिए डूंगरराम पर दबाव बनाया तो वह टाल-मटोल करने लगा। इसके बाद जब उसने पटवारी से ज़मीन के बारे में जानकारी हासिल की, तो उसे पता चला कि यह ज़मीन अनुसूचित जाति के एक व्यक्ति के नाम पर है और राजस्थान काश्तकारी अधिनियम और भू राजस्व अधिनियम के अनुसार, इसका विक्रय नहीं किया जा सकता है।
परिवादी के अनुसार, जब उसे 10 अक्टूबर 2025 को इस बात का पता चला तो उसने डूंगरराम को फोन किया, जिस पर उसने उसे धमकी दी और पैसे हड़प लेने की बात कही। वीरेंद्रसिंह का आरोप है कि डूंगरराम ने उसे पैसे और ज़मीन दोनों ही देने से इनकार कर दिया।
पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच हेड कांस्टेबल भगवानाराम को सौंप दी है। अब देखना यह है कि पुलिस की जांच में इस मामले से जुड़े और क्या तथ्य सामने आते हैं।