सूत्रों के अनुसार, इस प्रक्रिया के दौरान प्रत्येक ज़िले से छह नामों का एक पैनल तैयार किया गया था, जिसे पार्टी हाईकमान को भेजा गया। संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल, प्रदेश प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा, प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने इस रिपोर्ट पर गहन चर्चा की, जिसके बाद राहुल गांधी ने अंतिम सूची को मंज़ूरी दी।
इस बार कांग्रेस ने संगठन को मज़बूत करने और ज़मीनी स्तर के नेतृत्व को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 12 विधायकों को ज़िलाध्यक्ष बनाया है। इनमें अजमेर ग्रामीण से विकास चौधरी, बांसवाड़ा से अर्जुन सिंह बामणिया, डीडवाना-कुचामन से जाकिर हुसैन गैसावत, धौलपुर से संजय जाटव, जयपुर ग्रामीण वेस्ट से विद्याधर सिंह चौधरी, डूंगरपुर से गणेश घोघरा, झुंझुनूं से रीटा चौधरी, जोधपुर ग्रामीण से गीता बरवड़, करौली से घनश्याम मेहर, सवाई माधोपुर से इंद्रा मीणा, श्रीगंगानगर से रूपिंदर सिंह कुन्नर और चूरू से मनोज मेघवाल शामिल हैं।
पार्टी ने 5 ज़िलों में पूर्व विधायकों को ज़िम्मेदारी सौंपकर उनके संगठनात्मक अनुभव का लाभ उठाने का प्रयास किया है। इनमें अजमेर शहर में राजकुमार जयपाल, जयपुर ग्रामीण में गोपाल मीणा, भीलवाड़ा ग्रामीण में पूर्व मंत्री रामलाल जाट, कोटपूतली-बहरोड़ में इंद्राज गुर्जर और उदयपुर ग्रामीण में रघुवीर सिंह मीणा शामिल हैं।
कांग्रेस ने 8 ज़िलों में मौजूदा ज़िलाध्यक्षों को ही आगे जारी रखने का निर्णय लिया है। इनमें भरतपुर के दिनेश सिंह सूपा, बीकानेर ग्रामीण के बिशनाराम सियाग, दौसा के रामजीलाल ओड, कोटा ग्रामीण के भानुप्रताप सिंह, सीकर की सुनीता गठाला, उदयपुर शहर के फतेह सिंह राठौड़ और जयपुर ग्रामीण में फिर से गोपाल मीणा को मौका दिया गया है। इसके अलावा, जाकिर हुसैन गैसावत को नागौर के स्थान पर नए बने कुचामन-डीडवाना ज़िले की कमान सौंपी गई है।
जयपुर शहर, प्रतापगढ़, राजसमंद, बारां और झालावाड़ में ज़िलाध्यक्ष की घोषणा अभी नहीं हो सकी है। सूत्रों के अनुसार, बारां और झालावाड़ में उपचुनाव के कारण रायशुमारी नहीं हो पाई, जबकि जयपुर, प्रतापगढ़ और राजसमंद में चयन को लेकर अभी भी सहमति नहीं बन पाई है।
कांग्रेस ने नियुक्तियों में सामाजिक संतुलन को भी ध्यान में रखा है। 45 ज़िलाध्यक्षों में 16 ओबीसी, 9 एससी, 8 एसटी, 8 सामान्य वर्ग और 4 अल्पसंख्यक वर्ग से हैं। इसके साथ ही 7 महिलाओं को भी महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारी दी गई है, जो संगठन में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को दर्शाती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस की यह नई टीम आगामी चुनावों के लिए संगठन को मज़बूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। पार्टी इन नियुक्तियों के ज़रिए ज़मीनी स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है। यह देखना दिलचस्प होगा कि यह संगठनात्मक बदलाव कांग्रेस को चुनावी मैदान में कितना फ़ायदा पहुँचाता है।