दरअसल, यह मामला रेहड़ी-ठेला विक्रेताओं को काम करने के लिए स्थाई जगह उपलब्ध न कराने से जुड़ा है। विक्रेताओं का आरोप है कि उन्हें आए दिन अलग-अलग जगहों से हटाया जाता है, जिससे उनकी रोज़ी-रोटी पर संकट आ गया है।
बैठक में एसएफआई के पूर्व जिलाध्यक्ष मुकेश ज्याणी, गौरव टाडा, सुभाष जावा और गिरधारी जाखड़ ने भी विक्रेताओं की समस्याओं को सुना और उनका समर्थन किया। वक्ताओं ने रेहड़ी-ठेला विक्रेताओं को रोज़गार से वंचित करने को मजदूर विरोधी रवैया बताया। सभी ने एक स्वर में रेहड़ी-ठेला व मनिहारी यूनियन को स्थाई जगह उपलब्ध करवाने की मांग की और इस मुद्दे पर एक पालिका कार्मिक के खिलाफ भी नाराजगी व्यक्त की।
इस परिस्थिति में, यूनियन पदाधिकारियों ने स्थाई जगह की मांग को लेकर कल, यानी 24 सितंबर को गांधी पार्क से उपखंड कार्यालय तक एक विशाल आक्रोश रैली निकालने का निर्णय लिया है। यूनियन पदाधिकारियों ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि अगर उन्हें स्थाई जगह उपलब्ध नहीं करवाई गई तो उनका आंदोलन उग्र रूप ले सकता है।
यह देखना दिलचस्प होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या रुख अपनाता है और क्या रेहड़ी-ठेला विक्रेताओं को उनकी मांग के अनुसार स्थाई जगह मिल पाती है या नहीं। इस पूरे घटनाक्रम पर शहर की नज़र बनी हुई है।