यह समारोह कल, रविवार को सुबह 11 बजे राष्ट्र भाषा हिंदी प्रचार समिति सभागार में आयोजित होगा।
मनोज स्वामी का नाम राजस्थानी भाषा के प्रेमियों के बीच किसी परिचय का मोहताज नहीं है। उन्होंने न केवल राजस्थानी भाषा की मान्यता के लिए अथक प्रयास किए हैं, बल्कि इस भाषा में साहित्य को भी समृद्ध किया है। समिति के संयोजक डॉ. चेतन स्वामी ने बताया कि मनोज स्वामी ने राजस्थानी भाषा में रामलीला जैसे सांस्कृतिक प्रयोगों की शुरुआत करके इस भाषा को जन-जन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसके साथ ही, वे पिछले 40 वर्षों से स्वतंत्र पत्रकारिता के माध्यम से समाज को जागरूक करते आ रहे हैं।
समारोह में एक विचारोत्तेजक संवाद का भी आयोजन किया गया है, जिसका विषय है – “छैकड़ राजस्थानी नै मान्यता कियां मिलै?” (अंततः राजस्थानी को मान्यता कैसे मिलेगी?)। इस विषय पर श्याम महर्षि, डॉ. मदन सैनी, सत्यदीप, बजरंग सेवग, श्रीभगवान सैनी और विजय महर्षि जैसे विद्वान अपने विचार प्रस्तुत करेंगे, जो राजस्थानी भाषा की वर्तमान स्थिति और भविष्य की दिशा पर प्रकाश डालेंगे।
सम्मान के रूप में मनोज स्वामी को एक लाख रुपए, शॉल, श्रीफल और सम्मान-पत्र भेंट किए जाएंगे। यह सम्मान न केवल मनोज स्वामी के साहित्यिक योगदान का प्रतीक है, बल्कि राजस्थानी भाषा के प्रति उनके अटूट प्रेम का भी सम्मान है। यह आयोजन श्रीडूंगरगढ़ के साहित्य जगत के लिए एक महत्वपूर्ण घटना है, जो भाषा और संस्कृति के प्रति लोगों को प्रेरित करेगी।