27 अक्टूबर 2025, श्रीडूंगरगढ़। कालूबास स्थित नेहरू पार्क में आयोजित भागवत कथा में रविवार को महामंडलेश्वर आचार्य स्वामी भास्करानंदजी महाराज ने श्रद्धालुओं को कथा प्रसंगों के माध्यम से जीवन के कई उपयोगी सूत्र दिए।
महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि जीवन में दुखों का मुख्य कारण जगत को अधिक गंभीरता से लेना है। उन्होंने सुझाव दिया कि भक्त जगत को सहजता से लें और जगदीश (ईश्वर) को गंभीरता से लें, इससे जीवन की आधी से अधिक परेशानियां अपने आप समाप्त हो जाएंगी।
शुद्ध आहार के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि धर्म की शुरुआत रसोई से होती है। उन्होंने निंदा और चुगली से बचने का आग्रह करते हुए कहा कि हमें किसी और के अंदर के नकारात्मक विचारों को अपने भीतर नहीं आने देना चाहिए।
गुरु की महिमा का बखान करते हुए स्वामीजी ने गुरु कृपा से जुड़ी कथाएं सुनाईं और श्रोताओं को गुरु के प्रति श्रद्धा रखने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने अहिंसा और सहयोग को श्रेष्ठ गुण बताते हुए कहा कि ये पूजा के समान हैं। उन्होंने एकाग्रता के साथ कथा सुनने को भी तीर्थ के समान बताया और परमात्मा के प्रति पूर्ण समर्पण से जीवन जीने वालों के जीवन को सार्थक बताया।
महाराज ने आगे कहा कि आज का विज्ञान केवल बाहरी रूप से खुशहाली प्रदान करता है, जबकि हमारे धर्मशास्त्रों का विज्ञान अंदर और बाहर दोनों तरह से मजबूत करता है। उन्होंने सांसारिक कार्यों को करते रहने की सलाह दी, लेकिन साथ ही परमात्मा का आश्रय लेने की बात भी कही।
स्वामी जी ने गौमाता की सेवा की प्रेरणा देते हुए राजा परीक्षित और भक्त ध्रुव की कथाओं का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि सनातन संस्कृति केवल बच्चों के पालन-पोषण की बात नहीं करती, बल्कि उनमें अच्छे संस्कार देने की बात भी कहती है। बच्चों को सुविधाएं देना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें अच्छे संस्कार देना ही जीवन की सच्ची सफलता है।
महाराज ने सभी श्रद्धालुओं से कथा में शामिल होने पर आरती पूर्ण होने के बाद ही प्रस्थान करने का आग्रह किया।
शारदा सीताराम मोहता परिवार द्वारा आयोजित इस भव्य भागवत अनुष्ठान में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए और आयोजन की सराहना की। परिवार के सदस्यों ने कथा में विभिन्न व्यवस्थाओं को संभाला।