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कई संस्थाओं से जुड़े थे और सेवा में अग्रणी थे विक्रमसिंह, दो मासूम करते रहें पिता का इंतजार, गम में डूबा परिवार, गांव में पसरा मातम।

विक्रमसिंह, भारतीय जनता पार्टी के पूर्व मंडल अध्यक्ष थे और वर्तमान में भाजपा जिला कार्यसमिति के सदस्य थे। वे अपनी सकारात्मक ऊर्जा और मिलनसार स्वभाव के लिए जाने जाते थे। उनकी लोकप्रियता का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि विभिन्न राजनीतिक विचारधाराओं के लोग भी उनके निधन पर शोक व्यक्त कर रहे हैं।

विक्रमसिंह सत्तासर गौशाला के सचिव के रूप में भी पिछले डेढ़ दशक से सेवाएँ दे रहे थे। हाल ही में क्षेत्र में आयोजित राजपूत समाज के प्रतिभा सम्मान समारोह में उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई थी। वे कई सामाजिक संस्थाओं में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते थे और समाज के लिए हमेशा तत्पर रहते थे।

राजनीति में अपार संभावनाओं के साथ-साथ, विक्रमसिंह के कंधों पर परिवार की भी बड़ी जिम्मेदारी थी। जब वे केवल 13 वर्ष के थे, तब उनके पिता रतन सिंह का देहांत हो गया था। दो बहनें और तीन छोटे भाइयों के परिवार में वे सबसे बड़े थे। किशोरावस्था में ही उन्होंने परिवार का दायित्व संभाल लिया था। उनका एक छोटा भाई अभी भी पढ़ाई कर रहा है। विक्रमसिंह अपने पीछे एक बालक और एक बालिका को छोड़ गए हैं, जो शायद रात भर अपने पिता के लौटने का इंतजार करते रहे। उनकी माता, पत्नी और बहनों का करुण विलाप सुनकर पूरे गाँव का माहौल गमगीन हो गया है।

पुलिस को दी गई रिपोर्ट के अनुसार, विक्रमसिंह रात को गाँव बिंझासर से अपने गाँव सत्तासर लौट रहे थे। उनके भाई राजेंद्र सिंह ने बताया कि गाँव आडसर के निकट सड़क पर अचानक एक ऊंट आ गया, जिससे उनकी कार उससे टकरा गई। टक्कर इतनी ज़ोरदार थी कि कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई और उसमें सवार विक्रमसिंह की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। हेड कांस्टेबल देवाराम ने पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया और मामला दर्ज कर लिया गया है।

विक्रमसिंह के निधन की खबर मिलते ही रात में ही उनके समाज के अनेक लोग अस्पताल पहुँच गए। सत्तासर के सरपंच सुनील मलिक, सरपंच प्रतिनिधि झंझेऊ भागीरथ सिंह, पूर्व सरपंच रतन सिंह, पूर्व सरपंच धीरदेसर समुद्रसिंह, भागसिंह शेखावत और महावीर सिंह शेखावत ने अस्पताल पहुँचकर गहरा शोक व्यक्त किया। सुबह विश्वकर्मा कौशल विकास बोर्ड के अध्यक्ष रामगोपाल सुथार, पालिकाध्यक्ष मानमल शर्मा, भवानी तावनिया, सत्यनारायण स्वामी, एडवोकेट रणवीरसिंह खीची, श्याम शर्मा सहित अनेक गणमान्य लोग गाँव पहुँचे और अंतिम संस्कार में शामिल हुए। विधायक ताराचंद सारस्वत ने भी शोक संवेदना व्यक्त की है।

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