बीकानेर ज़िला परिषद में गुरुवार दोपहर राजस्थान ओबीसी आयोग द्वारा एक महत्वपूर्ण संभाग स्तरीय जनसंवाद एवं परिचर्चा कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम दोपहर 2 बजे से 4.30 बजे तक चला, जिसमें आयोग के अध्यक्ष, सेवानिवृत्त न्यायाधीश मदनलाल भाटी, सदस्य गोपाल कृष्ण, प्रो. राजीव सक्सेना, मोहन मोरवाल, पवन मंडाविया तथा सचिव अशोक कुमार जैन ने भाग लिया।
कार्यक्रम के दौरान, विभिन्न समुदायों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई, लेकिन एक विशेष मुलाकात ने सबका ध्यान खींचा। सिद्ध समाज विकास संस्थान के अध्यक्ष कुंभाराम सिद्ध के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने आयोग के अध्यक्ष से भेंट की। इस मुलाकात में सिद्ध समाज की वर्तमान स्थिति पर विस्तार से चर्चा हुई।
कुंभाराम सिद्ध ने आयोग अध्यक्ष को एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें सिद्ध जाति को केंद्रीय अन्य पिछड़ा वर्ग की सूची में सम्मिलित करने की पुरजोर मांग की गई। उन्होंने बताया कि सिद्ध जाति सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक और राजनीतिक रूप से एक अति पिछड़ी जाति है। राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग में भी इसे सबसे पिछड़े वर्ग में गिना गया है। सिद्ध ने वर्मा आयोग की रिपोर्ट 2001 का उल्लेख करते हुए बताया कि आयोग ने ओबीसी आरक्षण के तीन वर्ग बनाने का सुझाव दिया था, जिसमें ‘सी’ वर्ग, यानी अत्यधिक पिछड़ा वर्ग में सिद्ध जाति को शामिल करने की बात कही गई थी।
सिद्ध ने आयोग को अवगत कराया कि यह जाति राजस्थान के केवल सात जिलों में निवास करती है और इसकी जनसंख्या लगभग 1.50 लाख है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सिद्ध जाति को सामाजिक, शैक्षणिक, आर्थिक और राजनीतिक रूप से न्याय मिलना चाहिए, और इसके लिए आवश्यक है कि इसे राजस्थान राज्य की केंद्रीय अन्य पिछड़ा वर्ग की सूची में शामिल किया जाए।
आयोग अध्यक्ष मदनलाल भाटी ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि वे इस मामले का पर्याप्त अध्ययन करेंगे और उचित कार्रवाई करेंगे। उन्होंने कहा कि आयोग समाज के सभी वर्गों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है और इस दिशा में हर संभव प्रयास किया जाएगा।
इस अवसर पर, सेवानिवृत्त एएसपी गणेशनाथ और पंचायत समिति सदस्य भींयानाथ भी प्रतिनिधिमंडल में शामिल थे, जो सिद्ध समाज के प्रति अपनी एकजुटता और समर्थन का प्रदर्शन कर रहे थे। यह घटनाक्रम ओबीसी समुदायों के अधिकारों और प्रतिनिधित्व के प्रति जागरूकता और सक्रियता का प्रतीक है।