समिति के सदस्यों ने मंत्री कुमावत को श्रीडूंगरगढ़ के प्रथम श्रेणी पशु चिकित्सालय को बहुउद्देशीय पशु चिकित्सालय में क्रमोन्नत करने की आवश्यकता से अवगत कराया। समिति के अध्यक्ष जतनसिंह ने मंत्री को बताया कि श्रीडूंगरगढ़ अंचल में पशुपालकों की एक बड़ी आबादी निवास करती है, जिनकी आजीविका का मुख्य आधार पशुपालन ही है। इस क्षेत्र में ऊंट, गाय, भेड़, बकरी जैसे पशुधन की प्रचुरता है, जिसके कारण पशुधन की सुरक्षा, रोगों पर नियंत्रण और आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं की आवश्यकता लगातार बनी रहती है।
समिति के सदस्यों ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि संसाधनों, उपकरणों और कर्मचारियों की सीमित उपलब्धता के कारण पशुपालकों को समय पर उचित चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने में कठिनाई होती है। उन्होंने बताया कि चिकित्सालय के क्रमोन्नत होने से पशुपालकों को उन्नत चिकित्सा सेवाएँ, टीकाकरण, रोग निदान, दवा वितरण, दुग्ध उत्पादन संवर्धन और आपातकालीन चिकित्सा सुविधाएँ आसानी से उपलब्ध हो सकेंगी।
मंत्री जोराराम कुमावत ने समिति के सदस्यों की बातों को ध्यानपूर्वक सुना और उन्हें आश्वासन दिया कि वे इस दिशा में विभाग को आवश्यक निर्देश देंगे। उन्होंने समिति के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि पशुपालकों के हितों की रक्षा के लिए सरकार प्रतिबद्ध है।
इस अवसर पर समिति के अध्यक्ष जतन सिंह, पूर्व अध्यक्ष मनोज डागा, राजकुमार प्रजापत, जय धरू, सत्यनारायण टाक, मदन सोनी, प्रवीण पालीवाल, भीकमचंद सुथार, मनोज कायल, सांवरमल प्रजापत सहित अनेक सदस्य उपस्थित थे।
‘आपणो गांव सेवा समिति’ की यह पहल श्रीडूंगरगढ़ क्षेत्र के पशुपालकों के लिए एक नई उम्मीद लेकर आई है। अब देखना यह है कि सरकार इस दिशा में कितनी जल्दी कदम उठाती है, ताकि पशुपालकों को बेहतर चिकित्सा सेवाएं मिल सकें और उनकी आजीविका सुरक्षित रहे।