कार्यक्रम का शुभारंभ महिला मंडल द्वारा मधुर मंगलाचरण से हुआ, जिसने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। इसके बाद अणुव्रत समिति के मंत्री राकेश संचेती और तेरापंथ सभा संस्थान मोमासर के अध्यक्ष राजेंद्र संचेती के संदेशों को उपाध्यक्ष अशोक पटावरी ने पढ़कर सुनाया, जिनमें साध्वी प्रमिला कुमारी के प्रति गहरी श्रद्धा और मंगलकामनाएं व्यक्त की गईं थीं।
ग्राम सरपंच सरिता संचेती, बिहार से पधारे विरेंद्र संचेती, उपसरपंच जुगराज संचेती, महिला मंडल अध्यक्ष कंचन पटावरी, पूर्व अध्यापक गौरीशंकर जोशी, कल्पना सेठिया, जगत पटावरी, राजेश रोहिया (सुरवि चैरिटेबल ट्रस्ट), कांता सोनी जैसे गणमान्य लोगों ने अपने विचारों से कार्यक्रम को और भी गरिमामय बनाया। सभी ने गीतिका के माध्यम से साध्वी जी के प्रति अपनी मंगल भावनाएं व्यक्त कीं।
साध्वी आस्थाश्री ने अपने हृदय के भावों को बड़ी सुंदरता से प्रस्तुत किया, जबकि साध्वीवृंद ने मधुर गीतिका का गायन कर पूरे माहौल को भक्ति और आनंद से भर दिया।
अपने प्रवचन में साध्वी प्रमिला कुमारी ने जीवन के गहरे सत्य को उजागर करते हुए कहा, “आगमन और विदाई एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। साधु और जल चलते रहने से ही निर्मल रहते हैं, जैसे बहता पानी सदा पवित्र रहता है।” उन्होंने जीवन में परिवर्तन, साधना और प्रवास के महत्व पर प्रकाश डाला, जो श्रोताओं को सोचने पर मजबूर कर गया।
कार्यक्रम का कुशलतापूर्वक संचालन अणुव्रत समिति के अध्यक्ष सुमन बाफना ने किया।
कार्यक्रम के समापन के बाद साध्वी जी का जुलूस मुख्य बाजार से होता हुआ बाबूलाल लक्ष्मीपत संचेती के निवास स्थान तक गया। साध्वीवृंद अब आडसर की ओर प्रस्थान करेंगे और सुरेंद्र पटावरी के फार्म हाउस में विराजेंगे।