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आओ! इस दीपावली पर भगवती महालक्ष्मी का करें विधि पूर्वक आह्वान… डूंगरगढ़ one के साथ

दीपावली के पावन अवसर पर, हर घर माँ लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए आतुर रहता है। हर व्यक्ति अपनी क्षमतानुसार प्रयास करता है कि कुछ ऐसे उपाय करे, कुछ ऐसे विधान अपनाए या पूजन करे जिससे माँ महालक्ष्मी का आशीर्वाद उस पर सदैव बना रहे। माता के स्वागत के लिए फल, मेवा, नैवेद्य, पुष्प और बताशे श्रद्धा और विधि-विधान से अर्पित किए जाते हैं। दीपों से घर जगमगा उठते हैं।

इस पूजन विधि में, भावना की शुद्धि के साथ कुछ आवश्यक चरण भी हैं, जिनका पालन करके आम पाठक भी सहजता से अपने घर या प्रतिष्ठान पर यह पूजन कर सकता है।

आगामी वर्ष, 2025 में यह पर्व कई शुभ संयोग लेकर आ रहा है।
* **धनतेरस:** 18 अक्टूबर, 2025 (शनिवार) को कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी दोपहर 12:20 बजे से शुरू होगी। इस दिन पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र रहेगा और चंद्र राशि सिंह (रात्रि 10:12 के बाद कन्या) में प्रवेश करेगी। श्रीडूंगरगढ़ के समयानुसार, कुम्भ लग्न दोपहर 3:01 से 4:30 तक, मेष लग्न शाम 5:59 से 7:36 तक, वृषभ लग्न शाम 7:37 से 9:32 तक, मिथुन लग्न रात 9:33 से 11:46 तक और सिंह लग्न रात 2:04 से 4:19 तक रहेगा।
* धनतेरस पर यम दीप दान, श्री पूजन और श्री धन्वंतरि पूजन शाम 6:03 बजे से 8:35 बजे तक विशेष शुभ रहेगा।
* खरीदारी के लिए शुभ मुहूर्त सुबह 12:20 बजे से दोपहर 12:46 बजे तक और शाम 3:00 बजे से 4:32 बजे तक (अमृत वेला) रहेगा।
* **श्री महालक्ष्मी पूजन (दीपावली):** 20 अक्टूबर, 2025 को कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी के दिन मनाया जाएगा। इस दिन चंद्र राशि कन्या रहेगी। श्रीडूंगरगढ़ समयानुसार, अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:54 से दोपहर 12:42 तक और अमृत वेला शाम 4:32 से 5:57 तक रहेगी।
* पूजन के लिए शुभ मुहूर्त कुम्भ लग्न शाम 3:46 से 4:22 तक, मेष लग्न शाम 5:51 से 7:28 तक, वृषभ लग्न रात 7:29 से 9:25 तक, मिथुन लग्न रात 9:26 से 11:35 तक और सिंह लग्न रात 1:57 से 4:11 तक रहेगा।
* **रोकड़ मिलान मुहूर्त:** 22 अक्टूबर, 2025 (बुधवार) को प्रातः 6:44 से 9:33 (लाभ व अमृत वेला) और 10:58 से 12:22 (शुभ वेला) तक रहेगा।

माँ लक्ष्मी की आराधना के लिए कुछ आवश्यक सामग्रियों की आवश्यकता होगी:

* चांदी/कांसी की थाली, कुमकुम, चंदन, सिंदूर, अबीर-गुलाल, चावल, इत्र
* दूध, दही, घी, शहद, शर्करा (पंचामृत हेतु)
* मोली, जनेऊ, पुष्प, पुष्प-माला
* धूपबत्ती, दीपक (2 बड़े + 2 छोटे), माचिस, घी/तेल
* कांसी थाली, स्टील कटोरी, चमच, आसन
* कलश सामग्री: सुपारी, पीली सरसों, सर्व औषधि, सिक्का, नारियल, पंच पल्लव

यह पूजन विधि भावना और श्रद्धा के साथ की जानी चाहिए:

1. चांदी/कांसी की थाली पर कुमकुम से स्वास्तिक बनाएं।
2. एक सुपारी पर मोली लपेटकर गणपति बनाकर स्वास्तिक पर स्थापित करें।
3. कलश में जल भरें व उसमें सुपारी, पीली सरसों, औषधि व सिक्का डालें; कलश पर मोली बांधें व पंच पल्लव रखें।
4. यजमान पूर्वाभिमुख होकर बैठें और मंत्रों से जल का छींटा करें।
5. गणेश एवं अम्बिका को अक्षत, पुष्प, धूप, दीपक, नैवेद्य आदि अर्पित कर जल चढ़ायें।
6. क्रमिक स्नान: दूध → शुद्ध जल → दही → शुद्ध जल → घी → शुद्ध जल → मधु → शर्करा → पंचामृत।
7. वस्त्र, आभूषण, रक्तचंदन, सिंदूर, इत्र तथा पुष्प-माला अर्पित करें।
8. प्रसाद अर्पित कर आरती करें; अंत में जल गिराकर प्रसाद लें और आसन प्रणाम करें।

अब सर्वप्रथम यजमान सपत्नीक पूर्वाभिमुख होकर बैठ जाएं। तत्पश्चात निम्न मंत्र का उच्चारण करते हुए जल से अपने शरीर एवं समस्त पूजन सामग्री पर जल का छींटा देवें।

ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा।
यः स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः ॥
ॐ पुण्डरीकाक्षः पुनातु, ॐ पुण्डरीकाक्षः पुनातु, ॐ पुण्डरीकाक्षः पुनातु।

उसके बाद यजमान अपने दाहिने हाथ में अक्षत लेकर के भगवान गणेश एवं गौरी का ध्यान करें।

वक्रतुंड महाकाय कोटिसूर्यसमप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु में देव सर्वकार्येषु सर्वदा।।
नमो देव्यै महादेव्यै शिवायै सततं नमः।
नमः प्रकृत्यै भद्रायै नियता: प्रणता: स्म ताम।।

अक्षत भगवान गणेश व अम्बिका के आगे अर्पित कर दें।
अब भगवान गणेश व अम्बिका को धूप दिखाएं और बोले —
“ॐ गणेशाम्बिकाभ्यां नम: धूपमाघ्रापयामि।”
फिर गणेश अम्बिका को दीपक दिखाएं।
भगवान गणेश अम्बिका को प्रसाद चढ़ाएं और बोलें —
“ॐ गणेशाम्बिकाभ्यां नम: नैवेद्यम निवेदयामि।”
एक पुष्प के ऊपर कुमकुम और चावल लगाकर भगवान को अर्पित करें और बोलें —
“ॐ गणेशाम्बिकाभ्यां नम: गन्धाक्षत पुष्पं समर्पयामि।”

फिर हाथ में अक्षत पुष्प लेकर कलश देवता के अंदर सभी देवी-देवताओं का निम्न मंत्रों से ध्यान व आह्वान करें।

कलशस्य मुखे विष्णुः कण्ठे रुद्रः समाश्रितः ।
मूले त्वस्य स्थितो ब्रह्मा मध्ये मातृगणाः स्मृताः ॥
कुक्षौ तु सागराः सर्वे सप्तद्वीपा वसुन्धरा ।
ऋग्वेदोऽथ यजुर्वेदः सामवेदो ह्यथर्वणः ॥
अङ्गैश्च सहिताः सर्वे कलशं तु समाश्रिताः ।
अत्र गायत्री सावित्री शान्तिः पुष्टिकरी तथा ॥
आयान्तु देवपूजार्थं दुरितक्षयकारकाः ।
गङ्गे च यमुने चैव गोदावरि सरस्वति ।
नर्मदे सिन्धुकावेरि जलेऽस्मिन् सन्निधिं कुरु ॥
सर्वे समुद्राः सरितस्तीर्थानि जलदा नदाः ।
आयान्तु मम शान्त्यर्थं दुरितक्षयकारकाः ॥

भगवान कलश देवता को धूप दिखाएं।
कलश देवता को दीपक दिखाएं।
उसके बाद हाथ धो लें।
फिर भगवान कलश (वरुण) को नैवेद्यम समर्पित करें।
एक पुष्प के ऊपर कुमकुम व चावल लगाकर भगवान कलश देवता को अर्पित करें।

शास्त्रों के अनुसार कलश में सभी देवी-देवताओं का स्थान माना जाता है। इसलिए इसमें सभी देवी-देवताओं का ध्यान कर लें।

नानासुगन्धिपुष्पाणि यथाकालोद्भवानि च।
पुष्पाञ्जलिर्मया दत्तो गृहाण परमेश्वर ॥

हाथ में पुष्प लेकर भगवती महालक्ष्मी का ध्यान करें।

ॐ लक्ष्मी गणपतिभ्यां नमः ध्यानार्थे पुष्पाणि समर्पयामि।

बोलकर पुष्प गणेश जी और महालक्ष्मी पर चढ़ा दें।
अब हाथ में पुष्प लेकर भगवान गणेश और महालक्ष्मी का आह्वान करें।

ॐ लक्ष्मी गणपतिभ्यां नमः आह्वनार्थे पुष्पाणि समर्पयामि।

बोलकर पुष्प अर्पित कर दें।
हाथ में पुष्प लेकर भगवान गणेश और महालक्ष्मी को आसन प्रदान करें।

ॐ लक्ष्मी गणपतिभ्यां नमः आसनार्थे पुष्पाणि समर्पयामि।

बोलकर पुष्प समर्पित करें।
उसके बाद भगवान गणेश व महालक्ष्मी को 4 बार जल चढ़ाएं और बोले —

ॐ लक्ष्मी गणपतिभ्यां नमः
पादयोः पाद्यम् समर्पयामि।
हस्तयोर्घ्यं समर्पयामि।
आचमनियं जलं समर्पयामि।
सर्वाङ्गेषु स्नानं समर्पयामि।

स्नान के बाद “ॐ लक्ष्मी गणपतिभ्यां नमः” बोलकर आचमन के लिए जल दे दें।

ॐ लक्ष्मी गणपतिभ्यां नमः पयः स्नानमं समर्पयामि।

भगवान गणेश व महालक्ष्मी को दूध से स्नान कराएं।
उसके बाद शुद्ध जल से स्नान करवाएं।
ॐ लक्ष्मी गणपतिभ्यां नमः बोलकर दही से स्नान कराएं।
फिर शुद्ध जल से स्नान कराएं।
ॐ लक्ष्मी गणपतिभ्यां नमः बोलकर घी से स्नान कराएं।
उसके बाद पुनः शुद्ध जल से स्नान कराएं।
उसके बाद ॐ लक्ष्मी गणपतिभ्यां नमः बोलकर मधु से स्नान कराएं।
उसके बाद शुद्ध जल से स्नान कराएं।
ॐ लक्ष्मी गणपतिभ्यां नमः बोलकर शर्करा स्नान कराएं।
शुद्ध जल से स्नान कराएं।
उसके बाद ॐ लक्ष्मी गणपतिभ्यां नमः बोलकर पंचामृत से स्नान कराएं, फिर शुद्ध जल से स्नान कराएं।

यदि आप चाहें तो भगवती महालक्ष्मी का शुद्ध जल या दूध से श्री सूक्त का पाठ करते हुए अभिषेक कर सकते हैं।

उसके बाद ॐ लक्ष्मी गणपतिभ्यां नमः बोलकर गंध (केसर-मिश्रित चन्दन) मिश्रित जल से स्नान कराएं।
फिर शुद्ध जल से स्नान कराएं।

ॐ लक्ष्मी गणपतिभ्यां नमः बोलकर आचमन के लिए जल अर्पित करें।
फिर ॐ लक्ष्मी गणपतिभ्यां नमः बोलकर वस्त्र या मोली अर्पित करें।
उसके बाद आचमन के लिए जल दें।
उपवस्त्र के लिए पोशाक व साड़ी उपलब्ध हो तो चढ़ाएं या मोली चढ़ाएं।
ॐ लक्ष्मी गणपतिभ्यां नमः बोलकर मधु (शहद) कांसी के पात्र में चढ़ाएं।
फिर जल से आचमन करें।
ॐ लक्ष्मी गणपतिभ्यां नमः बोलकर आभूषण अर्पित करें।
ॐ लक्ष्मी गणपतिभ्यां नमः बोलकर रक्तचन्दन समर्पित करें।
ॐ लक्ष्मी गणपतिभ्यां नमः बोलकर सिंदूर चढ़ाएं।
ॐ लक्ष्मी गणपतिभ्यां नमः बोलकर कुमकुम चढ़ाएं।
ॐ लक्ष्मी गणपतिभ्यां नमः बोलकर सुगंधित तेल व इत्र चढ़ाएं।
ॐ लक्ष्मी गणपतिभ्यां नमः बोलकर कुमकुम युक्त चावल चढ़ाएं।
ॐ लक्ष्मी गणपतिभ्यां नमः बोलकर पुष्प व पुष्पमाला चढ़ाएं।
ॐ लक्ष्मी गणपतिभ्यां नमः बोलकर धूप दिखाएं।
ॐ लक्ष्मी गणपतिभ्यां नमः बोलकर दीपक दिखाएं।

उसके बाद हाथ धो लें।
“ॐ लक्ष्मी गणपतिभ्यां नमः” बोलकर प्रसाद व नैवेद्य चढ़ाएं।
एक बार पुनः विशेष प्रसाद चढ़ाएं और अंत में 5 बार जल चढ़ाएं।

उसके बाद ॐ लक्ष्मी गणपतिभ्यां नमः बोलकर दोनों हाथों की अनामिका अंगुली पर रक्तचन्दन लगाकर चढ़ाएं।
उसके बाद ॐ लक्ष्मी गणपतिभ्यां नमः बोलकर महालक्ष्मी को ऋतु फल (मतीरा, बोर, बाजरी, काचर का सिटा) चढ़ाएं।
उसके बाद ॐ लक्ष्मी गणपतिभ्यां नमः बोलकर ताम्बूल (बना हुआ पान) चढ़ाएं।
उसके बाद ॐ लक्ष्मी गणपतिभ्यां नमः बोलकर दक्षिणा चढ़ाएं।

इसके बाद गणेश व महालक्ष्मी की आरती करें।
आरती भगवान को दिखाएं, फिर जल गिराएं, आरती लें और अपने हाथों को धो लें।

अब अपने हाथों में पुष्प लेकर निम्न मंत्र बोलते हुए अर्पित करें —

नानासुगन्धिपुष्पाणि यथाकालोद्भवानि च।
पुष्पाञ्जलिर्मया दत्तो गृहाण परमेश्वर।।

दोनों हाथ जोड़कर भगवान गणेश और महालक्ष्मी को निम्न मंत्रों से नमस्कार करें —

वक्रतुण्ड महाकाय कोटिसूर्यसमप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा।।
या देवी सर्व भूतेषु महालक्ष्मीरूपेण संस्थिताः।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

उसके बाद यह कहते हुए जल छोड़ें —

ॐ अनेन यथाशक्ति अर्चनेन श्री महालक्ष्मीः प्रसीदतु।

अंत में आसन को प्रणाम करें और श्रद्धा सहित पूजन समाप्त करें।

यह पूजन विधि एक मार्गदर्शन है। श्रद्धा और भक्ति के साथ, अपने हृदय की भावनाओं को व्यक्त करते हुए, आप माँ लक्ष्मी की कृपा प्राप्त कर सकते हैं।

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