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अभाकिस के प्रतिनिधियों ने खरीद पंजीयन के लिए पोर्टल खोलने और सरकारी मूंगफली बेचना बंद करने की मांग की, दिया ज्ञापन

सरकारी खरीद के लिए वंचित किसानों के पंजीयन की बाट जोह रहे अन्नदाताओं के लिए एक उम्मीद की किरण नज़र आ रही है। राजफैड के पंजीयन पोर्टल को दोबारा खोलने की मांग ज़ोर पकड़ रही है, और किसान अपनी आवाज़ बुलंद कर रहे हैं।

मंगलवार को, अखिल भारतीय किसान सभा की स्थानीय इकाई के प्रतिनिधियों ने उपखंड अधिकारी से मुलाकात की। उन्होंने जिला कलेक्टर के नाम एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें किसानों की पीड़ा और मांगों का ज़िक्र था। सभा के नेता और क्रय विक्रय सहकारी समिति के सदस्य मोहनलाल भादू ने चिंता जताते हुए कहा कि मूंगफली और मूंग के बंद पड़े पोर्टल को फिर से खोला जाना चाहिए, ताकि वंचित किसान अपना पंजीयन करा सकें और सरकारी योजनाओं का लाभ उठा सकें।

किसानों ने समर्थन मूल्य पर फसल खरीद को जल्द शुरू करने की भी मांग की है। उनका कहना है कि बाजार में मूंगफली समेत सभी फसलें कम दामों पर बिक रही हैं, जिससे उन्हें भारी नुकसान हो रहा है। इसलिए, सरकार को खरीद का लक्ष्य बढ़ाना चाहिए ताकि अधिक से अधिक किसानों को फायदा हो सके।

किसानों ने खरीद के लिए पहले से लागू जनआधार, गिरदावरी, बटाईदार, ओटीपी जैसी शर्तों का हवाला देते हुए बिजली बिल की नई शर्त को अव्यवहारिक बताया है। उनका कहना है कि यह शर्त किसानों के लिए एक अतिरिक्त बोझ है और इसे तुरंत निरस्त किया जाना चाहिए। साथ ही, उन्होंने गिरदावरी सत्यापन कर ऑफलाइन गिरदावरी तहसीलदार द्वारा जारी करने की भी मांग की है।

मंडी सदस्यों ने एक गंभीर मुद्दे की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने बताया कि पिछले साल सरकार द्वारा समर्थन मूल्य पर खरीदी गई मूंगफली को इस सीजन में बाजार में बेचा जा रहा है, जिससे बाजार भाव में गिरावट आ गई है और किसानों को लाखों का नुकसान हो रहा है। उन्होंने मांग की कि सरकारी मूंगफली को ऑफसीजन में बेचा जाए और अभी इसे बेचना तुरंत बंद किया जाए, ताकि किसानों को और नुकसान से बचाया जा सके।

इस मौके पर किसान सभा के सत्तुनाथ सिद्ध, मुकेश ज्याणी, सरपंच सुनील मेघवाल, उपसरपंच लालचंद सारण, जगदीश जाखड़, गौरव टाडा, भानी सिंह भाटी, मदनलाल प्रजापत, सुभाष जावा, रामकिशन गावड़िया सहित अनेक किसान उपस्थित रहे। उनकी एकजुटता और हौसला यह दर्शाता है कि वे अपनी मांगों को लेकर कितने गंभीर हैं और अपने हक के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं। अब देखना यह है कि सरकार किसानों की इन जायज़ मांगों पर क्या रुख अपनाती है।

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