श्रीडूंगरगढ़, 8 अक्टूबर 2025। एक युवक को हरित ऊर्जा के सुनहरे भविष्य का सपना दिखाकर उससे लाखों रुपये ठगने का मामला सामने आया है। पीड़ित अंशुल गोदारा ने, न्याय की आस लिए, अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, श्रीडूंगरगढ़ की अदालत में एक आपराधिक परिवाद दायर किया है।
अंशुल गोदारा के अनुसार, उन्हें नितेन (जोधपुर), राजीव रंजन गुरु (गाजियाबाद, यूपी), लक्ष्मीपत शेखानी (कोलकाता), गीता शेखानी और प्रतीक शेखानी ने मिलकर अपने जाल में फंसाया। इन लोगों ने संयुक्त राष्ट्र (UNO) और भारत सरकार की हरित ऊर्जा नीति का हवाला देते हुए, उन्हें एक बड़े सौर ऊर्जा प्रोजेक्ट में निवेश करने के लिए प्रेरित किया।
परिवाद में कहा गया है कि आरोपियों ने स्वयं को सरकारी प्रोजेक्ट से जुड़ा हुआ विशेषज्ञ बताकर अंशुल का विश्वास जीता। उन्होंने “लाइट हाउस एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड” के नाम से एक परियोजना चलाने का दावा किया और अंशुल से प्रोजेक्ट में हिस्सेदारी के नाम पर कुल ₹89 लाख रुपये लिए। इनमें से ₹80 लाख लक्ष्मीपत शेखानी और उनके परिवार को नकद दिए गए, जबकि ₹9 लाख नितेन शर्मा को प्राप्त हुए।
पीड़ित का आरोप है कि आरोपियों ने फर्जी समझौते और दस्तावेजों का सहारा लेकर उनसे निवेश करवाया। उन्होंने दावा किया कि वे RRECL में सौर ऊर्जा प्रोजेक्ट का पंजीकरण करवा रहे हैं, लेकिन बाद में कोई काम नहीं किया गया। सूत्रों के अनुसार, आरोपियों ने सरकारी विभागों जैसे RRECL, JVVNL और AAI के नाम पर झूठे संदेश भेजकर यह दर्शाने की कोशिश की कि प्रोजेक्ट को मंजूरी मिल गई है।
जब अंशुल ने प्रोजेक्ट की प्रगति के बारे में पूछताछ की, तो आरोपियों ने टालमटोल करना शुरू कर दिया। बाद में उन्हें पता चला कि आरोपियों ने जानबूझकर डिमांड नोटिस जमा नहीं करवाया था, जिसके कारण पंजीकरण रद्द हो गया।
अंशुल ने बताया कि उन्होंने अपनी मेहनत की कमाई से भूमि लीज पर ली और पंजीकरण भी करवाया, लेकिन इस धोखाधड़ी ने सब कुछ बर्बाद कर दिया।
पीड़ित अंशुल गोदारा का कहना है, “इन लोगों ने संयुक्त राष्ट्र और सरकारी योजनाओं का नाम लेकर मुझे झूठा प्रोजेक्ट दिखाया, मेरे विश्वास का दुरुपयोग किया और लगभग 89 लाख रुपये हड़प लिए। यह एक सोची-समझी साजिश थी। अब मैं न्याय की उम्मीद में अदालत आया हूँ।”
यह मामला एक बार फिर हरित ऊर्जा के क्षेत्र में होने वाली धोखाधड़ी की ओर ध्यान आकर्षित करता है, और उन निवेशकों के लिए एक चेतावनी है जो आकर्षक रिटर्न के वादे पर आँख मूंदकर विश्वास कर लेते हैं। अदालत में दायर परिवाद के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि मामले की जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और पीड़ित को न्याय मिल पाता है या नहीं।