श्रीमती नौसाद ने अधिवक्ताओं से आग्रह किया कि वे मोटर दुर्घटना से संबंधित मामलों को लोक अदालत और मध्यस्थता के माध्यम से सुलझाने की दिशा में सक्रिय भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि लोक अदालतें और मध्यस्थता, विवादों के समाधान का एक त्वरित और प्रभावी माध्यम हैं। इन माध्यमों से, पीड़ित पक्ष को न केवल लंबी कानूनी प्रक्रियाओं से मुक्ति मिलती है, बल्कि उन्हें समय पर मुआवज़ा भी प्राप्त होता है।
न्यायाधीश महोदया ने कहा कि न्याय व्यवस्था का मूल उद्देश्य मात्र निर्णय देना नहीं है, बल्कि समाज के हर वर्ग तक न्याय की पहुंच को सुलभ और किफायती बनाना भी है। उन्होंने अधिवक्ताओं से अपेक्षा की कि वे आगे आएं और ऐसे मामलों को लोक अदालत तक पहुंचाने में सक्रिय रूप से सहयोग करें। उनका यह आह्वान, न्याय को घर-घर तक पहुंचाने के एक सामूहिक प्रयास का हिस्सा था।
इस अवसर पर बार संघ श्रीडूंगरगढ़ के अध्यक्ष, सत्यनारायण प्रजापत, अपर लोक अभियोजक सोहन नाथ सिद्ध, अधिवक्ता जगदीश बाना, बृजलाल बारोटिया, गणेशाराम, सुखदेव व्यास, तालुका कोर्ट के सचिव जगदीश चौधरी समेत कई अधिवक्ता मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में न्याय को सुलभ बनाने के इस प्रयास में अपना योगदान देने का संकल्प लिया। यह बैठक, न्याय की राह को आसान बनाने और पीड़ितों को त्वरित राहत प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।