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BIG BREAKING: श्रीडूंगरगढ़ में जमीन का सबसे बड़ा फर्जीवाड़ा, करोड़ों की जमीन फर्जी दस्तावेजों पर बिकी

श्रीडूंगरगढ़, 20 नवंबर 2025। जमीन को सबसे सुरक्षित निवेश मानने वालों के लिए एक चौंकाने वाली खबर श्रीडूंगरगढ़ से आई है। एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। एक गिरोह ने ओसवाल समाज की 16.72 हेक्टेयर जमीन को फर्जी तरीके से बेच डाला। हैरानी की बात यह है कि जमीन के तीन हिस्सेदार तो कई साल पहले ही इस दुनिया से जा चुके हैं।

लखासर की रोही में स्थित ओसवाल परिवार की यह जमीन कुछ बाहरी लोगों ने स्थानीय सहयोगियों के साथ मिलकर बेच दी। जब असली वारिस, जितेंद्र कुमार बोथरा, को इसकी जानकारी हुई तो वे सन्न रह गए। उन्हें बताया गया कि उनकी जमीन किसी और के नाम हो गई है। जितेंद्र कुमार का कहना है कि उन्होंने तो यह जमीन बेची ही नहीं थी।

इस मामले में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब पता चला कि जिन तीन लोगों ने कथित तौर पर जमीन बेची है, उनके मृत्यु प्रमाण पत्र मौजूद हैं। डालचंद बोथरा का निधन 29 जून 2013 को हुआ था, मूली देवी 31 जनवरी 1996 को चल बसीं थीं, और जीवराज का निधन 16 मार्च 1994 को हो गया था। लेकिन रजिस्ट्री के रिकॉर्ड बताते हैं कि ये तीनों 11 नवंबर को उप-पंजीयक कार्यालय में ‘हाजिर’ थे और उन्होंने जमीन बेच दी।

सूत्रों के अनुसार, इस फर्जीवाड़े में शामिल गिरोह ने मृत व्यक्तियों के नाम से फर्जी आधार कार्ड भी बनवाए थे। प्रथम दृष्टया, क्रेता के रूप में लिछमण सिंह पुत्र भंवरसिंह राजपूत निवासी कोलासर, श्रीकोलायत, बीकानेर का नाम सामने आ रहा है। इस फर्जीवाड़े में चंद्रप्रकाश पंचारिया (कोलायत) और हीरालाल पड़िहार (बीकानेर) नामक दो व्यक्तियों ने गवाह के रूप में मृत लोगों को ‘जिंदा विक्रेता’ के रूप में पेश किया।

सबसे आश्चर्यजनक बात यह है कि 17 नवंबर को उप-पंजीयक कार्यालय में रजिस्ट्री बिना किसी रोक-टोक के हो गई। यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी ऐसा मामला सामने आया है, जिससे समाज में गहरा आक्रोश है। नियमानुसार, रजिस्ट्री लेखन में लेखक का नाम और मुहर लगी होती है या वकील के हस्ताक्षर होते हैं, लेकिन इस मामले में उप-पंजीयक कार्यालय ने बिना लेखक के नाम और हस्ताक्षर के लापरवाही से फर्जी बिक्री का पंजीकरण कर दिया। लोग उप-पंजीयक कार्यालय की कार्यशैली पर सवाल उठा रहे हैं और इस बिक्री में मिलीभगत का आरोप लगा रहे हैं।

ओसवाल समाज ने स्थानीय विधायक से मांग की है कि इस गिरोह के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाए और रजिस्ट्री विभाग को जवाबदेह ठहराया जाए। इस घटना के बाद प्रवासी ओसवाल परिवारों में डर का माहौल है। खेत मालिकों का कहना है कि “अब जमीन भी चोरी होने लगी है, तो हम किस पर भरोसा करें?”

विधायक ताराचन्द सारस्वत ने कहा है कि ऐसे लोगों पर सख्ती किए बिना कुछ नहीं होगा। उन्होंने मांग की है कि इनके खिलाफ एफआईआर दर्ज होनी चाहिए और उन्होंने उप-पंजीयक कार्यालय को इस पर सख्ती करने के निर्देश दिए हैं।

एसडीएम शुभम शर्मा ने कहा है कि जमीन के वारिस उप-पंजीयक कार्यालय में लिखित शिकायत दर्ज कराएं। इसकी प्राथमिक जांच करके आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई जाएगी, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

तहसीलदार श्रीवर्द्धन शर्मा ने इस बारे में कहा है कि उप-पंजीयक कार्यालय सभी दस्तावेजों की जांच करने के बाद ही पंजीकरण करता है। अगर फिर भी यह भूल हुई है, तो आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाएगी और अब पंजीकरण में और ज्यादा सख्ती बरती जाएगी।

*(डूंगरगढ़ one के पास इस खबर से सम्बंधित सभी दस्तावेज उपलब्ध हैं।)*

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