शनिवार दोपहर 1:13 बजे पूर्ण हुआ संथारा, शाम 6 बजे निकलेगी अंतिम यात्रा
डूंगरगढ़ one 3 जनवरी, 2025 श्रीडूंगरगढ़। राजस्थान गौरव भामाशाह भीखमचंद पुगलिया की 90 वर्षीय माता, श्रद्धा की प्रतिमूर्ति किरण देवी पुगलिया ने उच्च आध्यात्मिक भावों के साथ संथारा स्वीकार कर शनिवार दोपहर 1:13 बजे समाधिमरण प्राप्त किया।
55 घंटे तक चले संथारे के दौरान वे पूर्ण चेतना और समभाव के साथ अध्यात्म में तल्लीन रहीं।
1 जनवरी को किया था संथारा स्वीकार
श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा की अध्यक्ष सुशीला पुगलिया ने बताया कि उनकी सास किरण देवी पुगलिया, धर्मपत्नी स्व. धर्मचंद्र पुगलिया (श्रीडूंगरगढ़- कोलकाता) ने आचार्य महाश्रमण की अनुमति से गुरुवार सुबह 6:15 बजे कोलकाता में तिविहार संथारे का प्रत्याख्यान स्वीकार किया था। यह प्रत्याख्यान उपासक जुगराज बैद द्वारा करवाया गया।
अस्वस्थता के चलते लिया जागरूक निर्णय
किरण देवी पुगलिया कुछ दिनों से अस्वस्थ चल रही थीं। उन्होंने पूर्ण जागरूकता और आत्मबोध के साथ संथारा स्वीकार करने की इच्छा व्यक्त की।
गुरुवार सुबह 3:05 बजे भीखमचंद पुगलिया एवं सुशीला पुगलिया ने उन्हें त्याग करवाया। भावों की उच्चता को देखते हुए आचार्य महाश्रमण की आज्ञा से संथारे का विधिवत प्रत्याख्यान सम्पन्न हुआ। इस दौरान मुनि जिनेश कुमार ने उन्हें आत्मबल प्रदान किया।
त्याग और तपस्या से ओतप्रोत रहा जीवन
गौरतलब है कि संथारा साधिका किरण देवी पुगलिया पर तीन आचार्यों का वरदहस्त रहा। उन्होंने अपने जीवन में सदैव त्याग, तपस्या और साधु-साध्वियों की सेवा को प्राथमिकता दी। उनका संपूर्ण जीवन अध्यात्म से ओतप्रोत रहा और अंतिम समय में संथारा स्वीकार कर उन्होंने आध्यात्मिक उत्कृष्टता का परिचय दिया।
शाम 6 बजे निकलेगी अंतिम यात्रा
किरण देवी पुगलिया की अंतिम यात्रा आज शाम 6 बजे बैकुंठी के साथ निकाली जाएगी।