श्रीडूंगरगढ़ ONE 24 दिसंबर 2025। एक दूसरे पर पुष्प उछाल कर होली खेलते श्रद्धालु, राधा नाम गाते हुए मस्त होकर झूमते श्रद्धालु, ब्रज होली का ये दृश्य मंगलवार को तेजा गार्डन में साकार हुआ। यहां होली खेल रहें बाकें बिहारी, रंग बरस रहा… भजन पर कृष्णप्रमियों ने जमकर पुष्प उड़ाए व खूब झूमते हुए ब्रज होली उत्सव का आनंद लिया । मौका था राधाकृष्ण करनाणी परिवार द्वारा आयोजित सप्त दिवसीय भागवत कथा के अंतिम दिन का, मंगलवार को सुदामा चरित्र वर्णन के साथ भागवत कथा संपन्न हुई। प्रसिद्ध कथा वाचक गौरव कृष्ण गोस्वामीजी ने प्रद्युमन्न जन्म कथा, जामवंत की पुत्री से विवाह, सत्यभामा, यमुना, मित्रवंदा, सत्याजी, भ्रदा, के साथ कृष्ण के विवाह प्रसंगो का उल्लेख किया। गोस्वामीजी ने राम के चरित्र पर चलने और कृष्ण के वचन पर चलने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि रामावतार के अधूरे कार्य परम ब्रह्म कृष्णावतार में पूर्ण करने आए और भक्तों के लिए विभिन्न लीलाएं की। महाराज ने बेटियों द्वारा दो घरों का कल्याण करने, सन्मार्ग पर चलकर धन कमाने, व जीवन में निराश नहीं होने की प्रेरणा दी। उन्होंने जरासंध वध कथा सुनाई और सुदामा चरित्र को विस्तार देते हुए सच्ची मित्रता निभाने की बात कही। महाराज ने जीवन में सदैव सकारात्मक ऊर्जा से भरे रहने और अपने ईष्ट पर प्रबल विश्वास रखने की बात कहते हुए कहा कि संसार दरवाजे बंद करें तो निराश ना हो प्रभु के द्वार खुल जाते है। उन्होंने कहा कि गरीब होने और दरिद्र होने में बड़ा अंतर है। गरीब वह जिसके पास धन का अभाव हो, पर दरिद्र वह जिसके पास संतोष नहीं है। उन्होंने कहा सुदामा परम संतोषी थे, वे मित्र द्वारकाधीश से मिलने गए तो प्रेमवश भगवान ने उन्हें सबकुछ दे दिया। महाराज ने कथा के अंतिम श्लोक का उच्चारण सभी से करवाया व नाम जप व प्रणाम का महत्व बताया। महाराज ने कथा श्रवण का फल सुनाते हुए सभी का आभार जताया। गोस्वामजी ने पांडाल छोड़ने से पहले सभी श्रद्धालुओं को अपने भीतर छुपे किसी दोष व बुराई को छोड़ देने का संकल्प करने की प्रेरणा भी दी।
आयोजक का सम्मान किया, व्यासपीठ का जताया आभार।
श्रीडूंगरगढ़ ONE। श्रीडूंगरगढ़ निवासी व दिल्ली प्रवासी राधाकृष्ण करनाणी परिवार द्वारा भव्य भागवत के आयोजन की सराहना करते हुए श्रीसुदंरकांड मित्र मंडली दिल्ली के अध्यक्ष श्यामसुदंर सोनी ने व्यास पीठ का आभार जताया। मंडली के सदस्यों ने आयोजक राधाकृष्ण करनाणी व उनकी पत्नी लीलादेवी को सम्मान पत्र देकर सम्मानित किया गया। कथा संपन्न होने के पश्चात पूर्णाहुति हवन का आयोजन किया गया। हवन में करनाणी परिवार सहित सभी रिश्तेदार शामिल हुए।