आज, श्रीडूंगरगढ़ में, पंचांग के शुभ संदेश के साथ दिन की शुरुआत हुई। श्री गणेश की आराधना और शास्त्रों के अनुसार तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण के महत्व का स्मरण दिलाया गया। मान्यता है कि इनके पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है, आयु में वृद्धि होती है, पापों का नाश होता है, प्रियजनों का प्रेम बना रहता है, और सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
आज का पंचांग बताता है कि तिथि प्रतिपदा है, नक्षत्र रोहिणी है, करण बालव और कौलव हैं, पक्ष कृष्ण है, और योग सिद्ध और साघ्य हैं। वार शुक्रवार है।
सूर्य और चंद्रमा की स्थिति पर ध्यान दें तो सूर्योदय 7:10 AM और सूर्यास्त 5:37 PM पर होगा। चन्द्रोदय 5:51 PM और चन्द्रास्त 7:31 AM पर होगा। चन्द्र राशि वृषभ है जो 10:16 PM तक रहेगी। ऋतु हेमंत है।
हिन्दू मास एवं वर्ष की गणना के अनुसार शक सम्वत 1947 विश्वावसु, काली सम्वत 5126, और विक्रम सम्वत 2082 है। मास अमांत मार्गशीर्ष और मास पूर्णिमांत पौष है। दिन काल 10:27:10 है।
दिन में अभिजीत मुहूर्त 12:03 PM से 12:45 PM तक रहेगा। वहीं, अशुभ समय में दुष्टमुहूर्त, कंटक, यमघण्ट, राहु काल, कुलिक, कालवेला / अर्द्धयाम, यमगण्ड और गुलिक काल शामिल हैं। दिशा शूल पश्चिम है।
ताराबल अश्विनी, कृत्तिका, रोहिणी, मृगशिरा, आर्द्रा, पुष्य, मघा, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, चित्रा, स्वाति, अनुराधा, मूल, उत्तराषाढ़ा, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, उत्तराभाद्रपद के लिए शुभ है। चन्द्रबल वृषभ, कर्क, सिंह, वृश्चिक, धनु, मीन के लिए शुभ है।
दिन के चोघडिया और लग्न तालिका भी दी गई है, जो दिन के विभिन्न समयों में शुभ और अशुभ कार्यों के लिए मार्गदर्शन करती है।
पंडित श्रीडूंगरगढ़ ONE ने आज के दिन को मंगलमय बताते हुए शुक्रवार के दिन किए जाने वाले विशेष उपायों का भी उल्लेख किया है। दक्षिणावर्ती शंख से भगवान विष्णु पर जल चढ़ाना, पीले चन्दन अथवा केसर का तिलक करना, श्री सूक्त, महालक्ष्मी अष्टकम, और माँ दुर्गा के 32 चमत्कारी नामों का पाठ करना, माँ लक्ष्मी को हलवे या खीर का भोग लगाना, और शुक्र ग्रह की आराधना करना विशेष फलदायी माना गया है।