बात कुछ यूं है कि बाड़ेला गांव के रहने वाले प्रकाश नायक ने अपने भाई रामनिवास के नाम पर रजिस्टर्ड बोलेरो पिकअप RJ-07 GD 8953 को बेचने के लिए फेसबुक पर एक पोस्ट डाली थी। गाड़ी पर AU फाइनेंस से लोन चल रहा था। कहते हैं न कि जरुरत ही आविष्कार की जननी है, ऐसे में प्रकाश की पोस्ट पर सीकर जिले के छिंछास गांव के कुलदीपसिंह और विक्रमसिंह की नज़र पड़ी। उन्होंने फ़ौरन प्रकाश से संपर्क साधा।
प्रकाश ने उन्हें साफ-साफ बता दिया कि गाड़ी फाइनेंस पर है और बेचने से पहले बकाया राशि चुकानी होगी। इस पर कुलदीप ने बड़े भरोसे से कहा कि वो 10-15 दिन में पूरा ऋण चुका देगा। दोनों पक्षों में ₹11.40 लाख में सौदा तय हो गया।
फिर 26 जुलाई 2025 को दोनों आरोपी बाड़ेला पहुंचे और बात पक्की होने के बाद श्रीडूंगरगढ़ आए, जहां ₹500 के स्टाम्प पर एक लिखित समझौता हुआ। समझौते के अनुसार आरोपियों ने ₹60,000 नकद दिए और बाकी राशि लोन चुकाकर ट्रांसफर कराने का आश्वासन दिया। प्रकाश ने उन पर भरोसा किया और गाड़ी के कागज़ात और गाड़ी, दोनों उन्हें सौंप दिए।
लेकिन, कहते हैं न कि लालच बुरी बला है। 10 अगस्त को जब बोलेरो की किस्त भरने की तारीख आई, तो प्रकाश ने कुलदीप को फोन किया। कुलदीप उन्हें आज-कल कहकर टालता रहा और न तो किस्त भरी, न ही गाड़ी ट्रांसफर करवाई।
फिर 1 सितंबर को प्रकाश ने दोबारा फोन किया, तो कुलदीप ने अपनी असली रंगत दिखाई। उसने साफ कह दिया कि “मैं फाइनेंस नहीं भरूंगा, गाड़ी भी वापस नहीं दूंगा। धोखा देकर गाड़ी लेनी थी, ले ली। अब इसे आगे बेच दूंगा।”
पीड़ित प्रकाश का कहना है कि दोनों आरोपी अब वाहन को खुर्द-बुर्द करने की भी धमकी दे रहे हैं। ऐसे में इंसाफ की गुहार लगाते हुए प्रकाश ने अदालत में एक अर्जी दाखिल की है, और न्याय की उम्मीद लगाए बैठा है। अब देखना ये है कि अदालत इस मामले में क्या रुख अपनाती है और पीड़ित को कब तक न्याय मिल पाता है।