यह परियोजना श्रीडूंगरगढ़ और आसपास के 108 गांवों के लिए जीवनदायिनी साबित होगी। लगातार गिरते भूजल स्तर और भीषण जल संकट से जूझ रहे इस इलाके के लिए यह योजना किसी वरदान से कम नहीं है।
यह परियोजना दो चरणों में पूरी की जाएगी। पहले चरण में 285 करोड़ रुपये की लागत से 1916 एमएल का रॉ वाटर डैम और 1865 केएलएच क्षमता का फिल्टर प्लांट बनेगा। साथ ही, कंवर सेन लिफ्ट कैनाल से 40 क्यूसेक पानी की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी।
दूसरे चरण में 372 करोड़ रुपये खर्च होंगे, जिनसे 44 उच्च जलाशय, 15 स्वच्छ जलाशय और 14 पंपिंग स्टेशन बनाए जाएंगे। नहरबंदी के दौरान भी पानी की आपूर्ति निर्बाध रहे, इसके लिए 30 दिनों का स्टोरेज भी बनाया जाएगा। उम्मीद है कि यह पूरा कार्य अगले 20 महीनों में पूरा हो जाएगा।
श्रीडूंगरगढ़ क्षेत्र में भूजल स्तर लगातार गिरता जा रहा है। कई जगहों पर पानी 2000 फीट से भी नीचे चला गया है, जिससे कई गांव खाली होने की कगार पर आ गए थे। स्थानीय लोगों का कहना था कि नेताओं ने वादे तो बहुत किए, लेकिन समाधान किसी ने नहीं निकाला।
ऐसे में, विधायक ताराचंद सारस्वत ने इस समस्या को चुनौती के रूप में लिया। चुनाव के समय उन्होंने क्षेत्र को नल के माध्यम से शुद्ध पेयजल दिलाने का वादा किया था, और विधायक बनने के बाद उन्होंने इसे एक व्यक्तिगत मिशन बना लिया।
उन्होंने विधानसभा में इस मुद्दे को कड़े शब्दों में उठाया और सरकार को चेताया कि अगर कुछ नहीं किया गया तो गांव खाली हो जाएंगे। उन्होंने अधिकारियों से लगातार पत्राचार किया, फाइलों का खुद पीछा किया और बजट, तकनीकी परीक्षण और पाइपलाइन मार्ग जैसी बाधाओं को दूर करने के लिए लगातार प्रयास करते रहे।
विधायक सारस्वत ने बताया कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और जल मंत्री कन्हैयालाल के सहयोग से परियोजना को उच्च प्राथमिकता मिली। उन्होंने इस मुद्दे को केंद्र सरकार तक पहुंचाया, जिसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सहमति से इस योजना की समयसीमा 2029 तक बढ़ाई गई, जबकि यह 2024 में ही समाप्त हो चुकी थी।
यह श्रीडूंगरगढ़ के इतिहास की अब तक की सबसे बड़ी जल परियोजना मानी जा रही है। स्थानीय लोग मानते हैं कि पहली बार किसी जनप्रतिनिधि ने इस संकट को इतनी गंभीरता से लिया और समाधान तक पहुँचाया। अब लोग विधायक ताराचंद सारस्वत को श्रीडूंगरगढ़ का ‘भागीरथ’ कहने लगे हैं।
विधायक ताराचंद सारस्वत ने घोषणा की है कि आगामी 20 महीनों में यह कार्य पूरा कर दिया जाएगा और 10 दिसम्बर को इस परियोजना का शिलान्यास किया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि कस्बे के लिए 80 करोड़ की एक और पेयजल योजना जल्द ही शुरू होगी। इस तरह, कुल 743 करोड़ रुपये के कार्य होंगे, जो क्षेत्र के लिए एक बड़ी सौगात है।
विधायक सारस्वत ने यह भी कहा कि भारत ने पाकिस्तान जाने से जो पानी रोका था, वह अब श्रीडूंगरगढ़ को मिलेगा, जिससे सिंचाई की समस्या से भी निजात मिलेगी और क्षेत्र खुशहाल होगा।
जल जीवन मिशन के एक्सईएन जितेंद्र झाम ने बताया कि इस परियोजना का स्रोत कंवरसेन लिफ्ट कैनाल रहेगा और आगामी 30 सालों तक पेयजल आपूर्ति इसी परियोजना से की जाएगी।
इस परियोजना के पूरा होने के बाद क्षेत्र की वर्षों पुरानी जल समस्या समाप्त हो जाएगी, नहरबंदी के दौरान भी निर्बाध पानी मिलेगा और सामाजिक, आर्थिक और स्वास्थ्य स्तर में बड़ा बदलाव आएगा।
श्रीडूंगरगढ़ अब मीठे नहरी पानी के युग में प्रवेश करने जा रहा है। यह न केवल वर्तमान पीढ़ी के लिए, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी एक बेहतर भविष्य की नींव रखेगा।