1 दिसंबर 2025 की सर्द रात, जब श्रीडूंगरगढ़ के गांव धोलिया की रोही में सब गहरी नींद में सोए थे, एक किसान परिवार पर मानो आसमान टूट पड़ा। रामस्वरूप नायक के दो झोपड़ों में अचानक आग लग गई, जिसने उनकी बरसों की जमा पूंजी को पल भर में राख कर दिया।
रात करीब एक बजे, ठुकरियासर मार्ग पर स्थित रामस्वरूप की ढाणी में अचानक आग की लपटें उठने लगीं। झोपड़ों में रामस्वरूप, उनकी पत्नी, दो बच्चे, माता और दो भतीजे सो रहे थे। आग की गर्मी से जब नींद खुली, तो महिलाएं चीख पड़ीं और बच्चों को लेकर बाहर भागीं।
रामस्वरूप ने बताया कि उनके खेत में बिजली का कनेक्शन नहीं है। उन्होंने आशंका जताई कि शायद जलते हुए दीये या चूल्हे की चिंगारी से आग लगी होगी। परिवार ने मिट्टी डालकर आग बुझाने की भरसक कोशिश की, लेकिन आग इतनी तेजी से फैली कि दोनों झोपड़ों को राख करने के बाद ही शांत हुई।
इस हादसे में परिवार के पास पहनने के कपड़ों के अलावा कुछ भी नहीं बचा। रामस्वरूप ने बताया कि दो दिन पहले ही ग्वार बेचकर उन्होंने 10 हजार रुपये का राशन खरीदा था, जो पूरी तरह से जल गया। इसके अलावा, बुजुर्ग मां के पास जमा किए 7-8 हजार रुपये, ग्वार, तिल, बाजरा, कपड़े, बिस्तर, बर्तन और जूते-चप्पल तक सब कुछ आग की भेंट चढ़ गया।
घटना के बाद परिवार सदमे में है। रामस्वरूप ने बताया कि उन्होंने पाई-पाई जोड़कर अपनी गृहस्थी बनाई थी, जो अब पूरी तरह से बर्बाद हो गई है।
पड़ोसियों ने आग बुझाने में मदद की और सरपंच व पटवारी को घटना की सूचना दी। उन्होंने प्रशासन से परिवार को जल्द से जल्द मदद पहुंचाने की मांग की है, ताकि वे फिर से अपना जीवन शुरू कर सकें। यह घटना एक बार फिर हमें याद दिलाती है कि जीवन कितना अनिश्चित है और हमें हर परिस्थिति के लिए तैयार रहना चाहिए।