श्री गणेशाय नम:।
आज, श्रीडूंगरगढ़ में, दिवस का आरंभ पंचांग के शुभ दर्शन से हुआ। पंचांग, जो भारतीय कालगणना का दर्पण है, न केवल तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण की जानकारी देता है, बल्कि जीवन में शुभ फलों की प्राप्ति का मार्ग भी प्रशस्त करता है।
मान्यता है कि तिथि के श्रवण मात्र से माँ लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है, और वार का ज्ञान आयु में वृद्धि करता है। नक्षत्रों का पठन पापों का नाश करता है, योग प्रियजनों के प्रेम को बनाए रखता है, और करण सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करता है।
आज का पंचांग बताता है कि तिथि एकादशी है, जो सायं 07:02 तक रहेगी। नक्षत्र रेवती रात्रि 11:18 तक विद्यमान रहेगा। करण वणिज, विष्टि सुबह 08:21 तक रहेंगे। पक्ष शुक्ल है और योग व्यतीपात रात्रि 00:58 तक रहेगा। आज सोमवार है।
सूर्य और चंद्रमा की स्थिति पर गौर करें तो सूर्योदय 07:07 पर हुआ और सूर्यास्त 05:37 पर होगा। चंद्रोदय दोपहर 02:35 पर होगा और चंद्रास्त अगले दिन सुबह 03:52 पर होगा। चंद्रमा मीन राशि में रात्रि 11:18 तक रहेगा। ऋतु हेमंत है, जो प्रकृति में शीतलता और शुष्कता का संचार करती है।
शक सम्वत 1947 विश्वावसु और विक्रम सम्वत 2082 है। मास अमांत मार्गशीर्ष और मास पूर्णिमांत मार्गशीर्ष है। दिन काल 10:30:03 का है।
दिन में अभिजीत मुहूर्त 12:01 PM से 12:43 PM तक रहेगा। अशुभ समय में दुष्टमुहूर्त, कंटक, यमघण्ट, राहु काल, कुलिक, कालवेला/अर्द्धयाम और यमगण्ड शामिल हैं, जिनमें सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
दिशा शूल पूर्व दिशा में है।
ताराबल अश्विनी, भरणी, रोहिणी, आर्द्रा, पुष्य, आश्लेषा, मघा, पूर्वा फाल्गुनी, हस्त, स्वाति, अनुराधा, ज्येष्ठा, मूल, पूर्वाषाढ़ा, श्रवण, शतभिषा, उत्तराभाद्रपद, रेवती नक्षत्रों के लिए शुभ है। चन्द्रबल वृषभ, मिथुन, कन्या, तुला, मकर, मीन राशियों के लिए अनुकूल है।
आज के चोघडिया में अमृत, काल, शुभ, रोग, उद्वेग, चल, लाभ जैसे विभिन्न मुहूर्त हैं, जिनमें प्रत्येक का अपना महत्व है। लग्न तालिका वृश्चिक से शुरू होकर तुला पर समाप्त होती है, जो दिन के विभिन्न समयों में विभिन्न लग्नों के प्रभाव को दर्शाती है।
पंचांग के अंत में कामना की गई है कि “आज का दिन मंगलमय हो।”
सोमवार के महत्व को रेखांकित करते हुए, भगवान शंकर की आराधना और अभिषेक का महत्व बताया गया है, जो चंद्रमा को मजबूत करता है और काल सर्प दोष के प्रभाव को कम करता है। सोमवार का व्रत मनचाहे जीवन साथी की प्राप्ति और वैवाहिक जीवन में सुख और दीर्घायु का आशीर्वाद लाता है।
शिवलिंग पर पंचामृत या मीठा कच्चा दूध एवं काले तिल चढ़ाने से भगवान महादेव की कृपा बनी रहती है और परिवार से रोग दूर रहते हैं। शिव पुराण के अचूक मंत्र “श्री शिवाय नमस्तुभ्यम्’ का जाप कष्टों को दूर करता है और मनोवांछित फल प्रदान करता है।
आज मोक्षदा एकादशी व्रत और गीता जयंती भी है, जो आध्यात्मिक चिंतन और ज्ञान के प्रसार का अवसर प्रदान करते हैं।
पंडित श्रीडूंगरगढ़ ONE द्वारा यह पंचांग प्रस्तुत किया गया, जो हमें समय के महत्व और शुभ कर्मों के प्रति जागरूक करता है।