श्रीडूंगरगढ़ के न्यायालय परिसर में, संविधान दिवस के अवसर पर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। न्यायाधीशों, वकीलों और न्यायालय कर्मचारियों ने एक साथ आकर संविधान के प्रति अपनी निष्ठा दोहराई और मूल कर्तव्यों के पालन की शपथ ली। यह दिन न्यायपालिका और विधि समुदाय के लिए आत्म-चिंतन और समर्पण का प्रतीक बन गया।
विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में, कोर्ट के पुस्तकालय कक्ष में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में, उपस्थित सभी लोगों ने संविधान की प्रस्तावना का वाचन किया, जो हमारे राष्ट्र की आत्मा है।
अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश सरिता नौशाद ने प्रस्तावना की मूल भावना पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह संविधान निर्माताओं की आकांक्षाओं और उद्देश्यों का दर्पण है। उन्होंने न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के मूल्यों पर जोर दिया, जो हर भारतीय नागरिक के लिए गरिमापूर्ण जीवन सुनिश्चित करते हैं और राष्ट्र की एकता और अखंडता को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि हर व्यक्ति के हृदय में संविधान के प्रति पूर्ण निष्ठा और सम्मान का भाव होना चाहिए।
तालुका कोर्ट के सचिव जगदीश चौधरी ने बताया कि कार्यक्रम में अधिवक्ताओं ने मूल कर्तव्यों और अधिकारों पर विस्तार से चर्चा की। सभी ने एक साथ मिलकर अपने कर्तव्यों का पालन करने का संकल्प लिया, जो एक मजबूत और न्यायपूर्ण समाज की नींव है।
इस अवसर पर एसीजेएम हर्ष कुमार, अपर लोक अभियोजक सोहननाथ सिद्ध, बार एसोसिएशन के अध्यक्ष सत्यनारायण प्रजापत, वरिष्ठ अधिवक्ता बाबूलाल दर्जी, पूनमचंद मारू, गोपीराम जानू, तालुका कोर्ट सचिव जगदीश चौधरी, कोर्ट रीडर राजेंद्र सैनी और एसीजेएम कोर्ट रीडर शंकरलाल रिठौदिया सहित कई गणमान्य वकील उपस्थित थे। सभी ने मिलकर संविधान के मूल्यों को अक्षुण्ण रखने और न्याय के पथ पर चलने का संकल्प लिया।
यह कार्यक्रम श्रीडूंगरगढ़ के विधि समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर था, जिसने उन्हें संविधान के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को नवीनीकृत करने और राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका को पुनः परिभाषित करने का मौका दिया।