श्रीडूंगरगढ़ के शांत परिवेश में, रिश्तों की डोर एक बार फिर दहेज की बलिवेदी पर टूटती नज़र आई। आड़सर बास की रहने वाली नेहा, जिनका विवाह दो वर्ष पूर्व हिमांशु के साथ हुआ था, ने अपने पति और ससुराल वालों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। यह मामला केवल दहेज की मांग का नहीं है, बल्कि एक परिवार के बिखरने और एक युवती के सपनों के चकनाचूर होने की कहानी है।
नेहा ने पुलिस में दर्ज कराई शिकायत में बताया कि उनके माता-पिता ने अपनी सामर्थ्य से बढ़कर दान-दहेज दिया था, लेकिन ससुराल पहुंचने के बाद भी उन्हें ताने सुनने पड़े। आरोप है कि नेहा के पति हिमांशु, ससुर विजयकुमार और सास हेमलता, उनसे लगातार पांच लाख रुपये नकद और एक नई कार की मांग कर रहे थे।
नेहा के अनुसार, उन्हें हर बात पर अपमानित किया जाता था और यह तक कहा जाता था कि हिमांशु का विवाह किसी और “मालदार” परिवार में कर दिया जाएगा। नेहा ने अपनी सास को “खतरनाक और खूंखार” बताते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने उनका घर बसने नहीं दिया और उन्हें आत्महत्या के लिए उकसाया।
पीड़िता के अनुसार, फरवरी 2025 में ससुराल वालों ने उन्हें यह कहकर पीहर भेज दिया कि वे उन्हें पसंद नहीं करते। इस दुर्व्यवहार के कारण नेहा की तबीयत बिगड़ गई और उन्हें कुछ समय के लिए आईसीयू में भी भर्ती रहना पड़ा। नेहा का आरोप है कि 18 जून 2025 को उनके पति और ससुराल वाले श्रीडूंगरगढ़ आए और उनके माता-पिता को गालियां दीं और अपमानित किया।
पुलिस ने नेहा की शिकायत पर मामला दर्ज कर लिया है और जांच एसआई राजेंद्र कुमार को सौंप दी गई है। यह मामला एक बार फिर समाज में व्याप्त दहेज की कुप्रथा की ओर इशारा करता है, जो न केवल रिश्तों को कलंकित करती है, बल्कि परिवारों को भी तबाह कर देती है। अब देखना यह है कि इस मामले में जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और न्याय की राह पर चलते हुए, क्या नेहा को उसका खोया हुआ सम्मान और हक वापस मिल पाता है।