यह निर्णय, हालांकि सुरक्षा के लिहाज़ से ज़रूरी था, आसपास के किसानों के लिए एक नई चुनौती लेकर आया है। बासी महियान, खरला, गोनाणा और कालछा रोही के किसानों को अब अपने खेतों तक पहुंचने के लिए लगभग 20 किलोमीटर का अतिरिक्त सफर तय करना होगा।
दरअसल, रेलवे ने दुलचासर-कोटासर अंडरब्रिज के पास स्थित तिराहे मार्ग को, पूर्व सूचना और निर्धारित अवधि के बाद, आवागमन के लिए बंद कर दिया है। रेलवे की जमीन से गुजरने वाले इस रास्ते को बड़े पत्थर लगाकर अवरुद्ध कर दिया गया है, जिससे स्थानीय लोगों में निराशा है।
रेलवे का तर्क है कि ट्रेनों के सुरक्षित संचालन के लिए रेल पटरियों के समानांतर चलने वाले रास्तों को बंद करना आवश्यक है। सूत्रों की मानें तो रेलवे इस स्थान पर दो तरफ दीवार बनाकर टीनशेड लगाने की योजना बना रहा है। फिलहाल पत्थरों से अस्थायी रूप से रास्ता बंद किया गया है ताकि निर्माण कार्य बिना किसी बाधा के पूरा हो सके। निर्माण पूरा होने के बाद इन रास्तों को स्थायी रूप से बंद कर दिया जाएगा।
इस मार्ग के बंद होने से किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। दुलचासर के निवासी जगदीश प्रसाद महिया बताते हैं कि उनका खेत बासी महियान रोही में है, जहां पहले 6 किलोमीटर की दूरी तय करके पहुंचा जा सकता था। अब, रास्ता बंद होने के कारण उन्हें पहले भोजास गांव, फिर बेनीसर और अंत में दुलचासर गांव होकर जाना होगा, जिससे सफर 25 किलोमीटर का हो जाएगा।
इसी तरह, कालछा रोही के किसान किशोर सिंह को अब दुलचासर पहुंचने के लिए पहले सावंतसर और फिर सूडसर होकर जाना होगा, यानी 20 किलोमीटर का अतिरिक्त सफर। किसानों का कहना है कि खेतों में चारा और कटी फसलें पड़ी हैं, जिन्हें घर और मंडी तक पहुंचाना है।
किसानों ने रेलवे से अपील की है कि रास्ते बंद करने से पहले खेतों की ओर जाने वाले रास्तों पर अंडरब्रिज का निर्माण किया जाए। पूर्व विधायक गिरधारीलाल महिया ने भी किसानों के लिए रास्ते की मांग की है। उन्होंने कहा कि खेतों में खरीफ की कटाई और रबी की बुवाई का समय है और ऐसे में सदियों से इस्तेमाल हो रहे रास्तों को अचानक बंद करना गलत है। उन्होंने जिला प्रशासन से किसानों को खेतों तक पहुंचने के लिए वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराने की मांग की है।
इस बीच, दुलचासर के पूर्व सरपंच मोडाराम महिया ने बताया कि किसानों का एक प्रतिनिधिमंडल जल्द ही क्षेत्रीय विधायक ताराचंद सारस्वत से मिलकर समस्या के समाधान के लिए उचित कार्रवाई की मांग करेगा।
यह घटनाक्रम न केवल किसानों के लिए एक तात्कालिक चुनौती है, बल्कि विकास और जन-सुविधाओं के बीच संतुलन साधने की आवश्यकता पर भी प्रकाश डालता है। अब देखना यह है कि रेलवे और स्थानीय प्रशासन मिलकर इस समस्या का क्या समाधान निकालते हैं, ताकि किसानों को राहत मिल सके और क्षेत्र में विकास भी बाधित न हो।