विशेष बात ये है कि शिक्षा विभाग ने इस बार सख्ती का परिचय देते हुए पूर्व में जारी हुई 5 हजार तबादलों की सूची में बहुत कम संशोधन किए हैं। ऐसे में वे 700 से अधिक प्राचार्य, जिन्होंने बदलाव की उम्मीद संजो रखी थी, कहीं न कहीं निराश हुए हैं।
सूत्रों की मानें तो शिक्षा मंत्री स्तर पर तैयार की गई यह सूची पहले मुख्यमंत्री सचिवालय को भेजी गई थी। वहां इस सूची को स्वीकृति मिलने में लगभग एक महीने का समय लग गया। मुख्यमंत्री सचिवालय से हरी झंडी मिलने के बाद ही रविवार सुबह इसे सार्वजनिक किया गया। यह भी बताया जा रहा है कि पिछली सूची में शामिल कुछ बड़े नामों को इस बार हटा दिया गया है।
दो महीने पहले जारी हुई सूची में जिन प्राचार्यों को अपने गृह जिले से बाहर भेजा गया था, उन्हें उम्मीद थी कि इस बार उन्हें अपने गृह जिले में सेवा का अवसर मिलेगा। कुछेक को ज़रूर इसका लाभ मिला, लेकिन अधिकांश प्राचार्यों के आदेश पहले जैसे ही रहे। यहां तक कि कई महिला प्राचार्याओं को भी आवेदन और गुहार के बावजूद अपने गृह जिले में स्थानांतरित होने का अवसर नहीं मिल पाया।
शिक्षा विभाग ने इस तबादला सूची को महीने भर पहले ही अंतिम रूप दे दिया था। माध्यमिक शिक्षा निदेशालय से एक टीम को जयपुर बुलाया गया था। रिक्त पदों के आधार पर सूची तैयार की गई, और एक प्राचार्य को हटाकर दूसरे को नियुक्त करने की कवायद भी चली। शुरुआत में इस सूची में लगभग 700 नाम थे, लेकिन अंतिम स्वीकृति मिलने तक यह संख्या घटकर 620 रह गई।
सूत्रों के अनुसार यह तबादला सूची लगभग सभी जिलों को प्रभावित करती है। यहां तक कि शिक्षा निदेशालय स्तर के अधिकारियों के जिलों में भी बदलाव किए गए हैं।
शिक्षा विभाग की इस सूची के जारी होने के बाद अब अगले सप्ताह तक ज्वाइनिंग और रिलीविंग की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है। वहीं, तबादले से असंतुष्ट प्राचार्य अब शासन स्तर पर फिर से समीक्षा की मांग कर सकते हैं। देखना ये होगा कि आने वाले दिनों में इस तबादला सूची को लेकर क्या घटनाक्रम सामने आते हैं।