समारोह एक उत्सव की तरह था, जिसमें साहित्य और समाजसेवा के प्रति समर्पित लोग एक साथ आए। डॉ. अलका धनपत और भीखमचंद पुगलिया कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। राजस्थानी प्रचारणी सभा के अध्यक्ष रतन शाह ने समारोह की अध्यक्षता की, जिससे इस अवसर की गरिमा और भी बढ़ गई। मंच पर राजस्थान फाउंडेशन कोलकाता चैप्टर के चेयरमैन संतोष राजपुरोहित, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया कोलकाता के संयुक्त महाप्रबंधक अशोक कुमार वर्मा, पूर्व प्रोफेसर डॉ. सुधा मल्होत्रा, भारत जैन महिला मंडल से अंजु सेठिया और समाजसेवी सुशीला पुगलिया जैसे विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष बना दिया।
कार्यक्रम के दूसरे भाग में, मॉरिशस में हिन्दी साहित्य को नई ऊँचाइयों पर ले जाने वाली डॉ. अलका धनपत ने इस वर्ष का अहिंसा पुरस्कार समाजसेवी और दानवीर भीखमचंद पुगलिया को प्रदान किया। यह सम्मान भारत जैन महिला मंडल की ओर से दिया गया, जो अहिंसा के मूल्यों को समाज में बढ़ावा देने के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
इस अवसर पर भीखमचंद पुगलिया ने कहा कि यह सम्मान उन्हें समाजसेवा और अहिंसा के मार्ग पर और अधिक प्रगति करने के लिए प्रेरित करेगा। उन्होंने आगे कहा कि जीवन में अहिंसा के माध्यम से ही विजय प्राप्त की जा सकती है और समस्याओं का समाधान संभव है। उनके ये शब्द श्रोताओं को गहराई तक छू गए, और अहिंसा के महत्व को रेखांकित किया।
कार्यक्रम का कुशलतापूर्वक संचालन भारत जैन महिला मंडल कोलकाता की संस्थापक सदस्य और समाजसेविका अंजु सेठिया ने किया। उनकी वाक्पटुता और आयोजन क्षमता ने समारोह को और भी जीवंत बना दिया। यह कार्यक्रम श्रीडूंगरगढ़ के लिए एक यादगार घटना थी, जिसने समाजसेवा और साहित्य के महत्व को एक बार फिर उजागर किया।