श्रीडूंगरगढ़ की धरती पर इंसाफ की एक कहानी लिखी गई। एडीजे कोर्ट की न्यायाधीश सरिता नौशाद ने सोमवार को एक पुराने और दर्दनाक मामले में फैसला सुनाया। 2018 में हुई एक हत्या के मामले में अदालत ने दोषी को आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई। यह मामला एक मासूम बच्चे की जान लेने से जुड़ा था, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया था।
अपर लोक अभियोजक सोहननाथ सिद्ध ने इस मामले की गंभीरता और पेचीदगियों से अदालत को अवगत कराया। उन्होंने बताया कि यह दुखद घटना 28 जनवरी 2018 को घटित हुई थी। दातारामगढ़ निवासी केसरदेवी, जो घटना के समय कालेरा रोही में रहती थीं, ने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई। केसरदेवी ने अपने जेठ, धनेरू की रोही में रहने वाले पवन पुत्र मोहनराम पर आरोप लगाया कि उसने उनके 9 वर्षीय पुत्र मुकेश की गोली मारकर हत्या कर दी है।
कहानी में एक मोड़ तब आया जब पुलिस ने आरोपी पवन को 30 जनवरी 2018 को गिरफ्तार किया। पुलिस ने अपनी जांच में कोई कसर नहीं छोड़ी और बालक के शव को ज़मीन से निकालकर, बंदूक और अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य अदालत में पेश किए।
केसरदेवी ने अदालत को बताया कि उनके जेठ के कोई संतान नहीं थी, इसलिए उसने अक्सर मुकेश को अपने पास बुलाया करता था। पीड़िता ने बताया कि उसने अपनी ननद और नणदोई के साथ मुकेश को जेठ के डेरे पर भेजा था। कुछ दिनों बाद, आरोपी पवन ने उन्हें बताया कि मुकेश रात को डेरे से कहीं चला गया है।
केसरदेवी और उनके भाई ने अपने बेटे की तलाश में दिन-रात एक कर दिए। तभी, एक पड़ोसी ने उन्हें बताया कि आरोपी पवन बनबावरी ने मुकेश की रात को गोली मारकर हत्या कर दी और उसके शव को चुनाराम के खेत में मिट्टी में दबा दिया।
केसरदेवी ने हिम्मत नहीं हारी और पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई। सालों तक चले इस मुकदमे में आज अदालत ने अपना फैसला सुनाते हुए पवन को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। यह फैसला न केवल एक मासूम बच्चे को इंसाफ दिलाता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि कानून के हाथ कितने लंबे होते हैं, और अपराध कभी छिप नहीं सकता। यह कहानी श्रीडूंगरगढ़ की धरती पर हमेशा याद रखी जाएगी, एक ऐसी कहानी जो इंसाफ के लिए उम्मीद और दृढ़ संकल्प का प्रतीक है।