साध्वी दीदी ने अपने प्रवचन में कहा कि आज मनुष्य के पास सुख-सुविधाओं के साधन तो प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं, किंतु सच्ची शांति और समृद्धि का मार्ग तो गौसेवा से ही प्रशस्त होता है। उन्होंने उपस्थित श्रद्धालुओं से नशा त्यागने का आह्वान करते हुए कहा, “मनुष्य जीवन अमूल्य है, इसे सार्थक बनाएं, अन्यथा जीवन पतन की ओर अग्रसर हो जाता है।”
साध्वी दीदी ने गौमाता के सान्निध्य के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जो लोग गाय के निकट रहते हैं, वे शारीरिक और मानसिक रूप से अधिक स्वस्थ रहते हैं। उन्होंने धन के महत्व को स्वीकारते हुए कहा कि जीवन में धन आवश्यक है, परन्तु धन ही सब कुछ नहीं है। सेवा, त्याग और प्रेम से बढ़कर कोई धर्म नहीं है।
अपने संबोधन के दौरान, साध्वी दीदी ने केंद्र सरकार से गौवध निषेध कानून बनाने की पुरजोर मांग की। उन्होंने कहा कि गाय को राजनीति से दूर रखकर, संस्कृति और आस्था के साथ जोड़कर इसका संरक्षण करना चाहिए।
इस अवसर पर गौशाला प्रबंधक मालाराम शर्मा ने बताया कि मालाराम गोदारा, तुलछाराम नाई, दुर्गाराम बिरडा, मालाराम नाई, डूंगरराम धानिया, तुलछनाथ, मोहनराम सारण, मामराज ढाका, मूलाराम नाई, बद्रीराम ज्यानी सहित बड़ी संख्या में ग्रामवासियों ने साध्वी दीदी का भावपूर्ण स्वागत और सम्मान किया।
सत्संग में कथा वाचिका ब्रिज राधे किशोरी (वृंदावन) की उपस्थिति ने भी भक्तों को आनंदित किया। दूर-दराज से आए गोभक्तों में हरिराम भादू (लिखमीसर दिखनादा), लूणाराम जाखड़ (लिखमीसर), भंवरलाल गोदारा (पूर्व सरपंच, दुशारणा), श्री जसनाथ पेडगासस गौशाला के हनुमान गोदारा, मालाराम गोदारा, भैराराम नई सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित थे।