सरकार के इस निर्णय का सीधा प्रभाव रजिस्ट्री की न्यूनतम कीमत पर पड़ेगा। हालांकि, शहरों और कस्बों में आमतौर पर संपत्ति का बाजार मूल्य सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम मूल्य से अधिक होता है, इसलिए सामान्य खरीदारों पर इसका तत्काल प्रभाव शायद उतना महसूस न हो।
वित्त विभाग द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, आरसीसी छत वाले मकानों की निर्माण लागत 1200 रुपये प्रति वर्ग फीट से बढ़ाकर 1800 रुपये प्रति वर्ग फीट कर दी गई है, यानी सीधे 600 रुपये प्रति वर्ग फीट की वृद्धि हुई है।
सरकार ने बहुमंजिला वाणिज्यिक इमारतों की निर्माण लागत में भी वृद्धि की है:
* बेसमेंट और मल्टीप्लेक्स वाले शॉपिंग मॉल: 1815 रुपये से बढ़कर 2100 रुपये प्रति वर्ग फीट
* बिना मल्टीप्लेक्स वाले मॉल: 1430 रुपये से बढ़कर 2000 रुपये प्रति वर्ग फीट
* 5 सितारा और उससे ऊपर के होटल व क्लब: 2090 रुपये से बढ़कर 2500 रुपये प्रति वर्ग फीट
* 5 सितारा से नीचे वाले होटल: 1595 रुपये से बढ़कर 2100 रुपये प्रति वर्ग फीट
अब तक खाली जमीन पर बनी बाउंड्रीवाल की लागत 400 रुपये प्रति रनिंग मीटर मानी जाती थी, जिसे बढ़ाकर 500 रुपये प्रति रनिंग मीटर कर दिया गया है।
औद्योगिक प्लॉट पर बने शेड या वेयरहाउस की निर्माण लागत भी बढ़ाई गई है, जो अब 4000 रुपये से बढ़कर 5000 रुपये प्रति वर्ग मीटर हो गई है।
सरकार ने सीधे तौर पर स्टाम्प ड्यूटी या डीएलसी दरें बढ़ाए बिना रजिस्ट्री की लागत बढ़ाने का मार्ग खोज लिया है। निर्माण लागत में वृद्धि से बड़े वाणिज्यिक परियोजनाओं, मॉल, होटल और औद्योगिक इकाइयों की रजिस्ट्री पर अधिक खर्च आएगा।
आम खरीदार को फिलहाल राहत मिल सकती है, लेकिन बिल्डरों और बड़े निवेशकों की जेब पर इसका असर पड़ना तय माना जा रहा है। यह देखना दिलचस्प होगा कि इस फैसले से आने वाले समय में प्रॉपर्टी बाजार में क्या बदलाव आते हैं।